पासपोर्ट घोटाले में दो हवलदार बर्खास्त

Ludhiana Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
मोगा। बहुचर्चित पासपोर्ट घोटाले में फंसे दो हवलदारों को विदेशी नागरिक रजिस्ट्रेशन फीस घोटाले के केस में बर्खास्त कर दिया गया है। इस घोटाले में पहले ही एक और हवलदार को बर्खास्त किया जा चुका है।
थाना सिटी पुलिस ने 13 जुलाई 2008 को पुलिस मुलाजिम की शिकायत पर हवलदार जसविंदर सिंह, रंजीत सिंह, गुरदयाल सिंह के अलावा चंडीगढ़, लुधियाना, मोगा के ट्रेवल एजेंटों और चंडीगढ़ पासपोर्ट दफ्तर के मुलाजिम, डाक घर के दो पोस्टमैन के खिलाफ केस दर्ज किया था। केस दर्ज होने के बाद इन हवलदारों को निलंबित कर दिया गया था। पासपोर्ट घोटाले की जांच के लिए विशेष जांच टीम का गठन कर दिया गया था। जिले से संबंधित 795 पासपोर्ट फाइलें की जांच दौरान करीब 395 जाली पासपोर्ट की पुष्टि हुई थी। अब तक इस घोटाले में करीब 86 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस घोटाले में फंसे हवलदार जसविंदर सिंह ने फरीदकोट पुलिस के एक थानेदार की मदद से एक मृतक व्यक्ति के नाम पर पासपोर्ट बना लिया था और विदेश भेजने की फिराक में था। फरीदकोट पुलिस ने हवलदार जसविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद जिला पुलिस ने बीते 1 जून को हवलदार जसविंदर सिंह को नौकरी से बर्खास्त कर दिया और हवलदार रंजीत सिंह व गुरदयाल सिंह के खिलाफ विभागीय जांच जारी रखी। अब इन दोनों को भी नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।
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यह था पासपोर्ट घोटाला
मोगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय की पासपोर्ट शाखा में आरोपी हवलदार तैनात थे और शिकायतकर्ता भी इसी शाखा में तैनात था। किसी कारण पुलिस मुलाजिमों में बिगड़ गई और शिकायतकर्ता पुलिस मुलाजिम सतपाल ने पूरे मामले से पर्दा उठा दिया और खुद लिखित शिकायत कर डाली। पुलिस मुलाजिम ने अपनी शिकायत में खुलासा किया था कि ट्रेवल एजेंटों की मिलीभगत से बाहरी जिले के रहने वाले लोग मोगा का निवासी बताकर फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए पासपोर्ट जारी करवाकर विदेश फुर्र हो जाते हैं। पुलिस ने इस शिकायत के बाद पर्चा दर्ज कर जांच की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई विदेशों में डिपोर्ट लोगों ने भी फर्जी नाम पर पासपोर्ट जारी करवाए थे जो कि आपराधिक मामले में फंसे थे।

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