पंजाब के किसानों ने जार्जिया में गाड़े झंडे

Ludhiana Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
मोगा। पंजाब में कम हो रही खेतीबाड़ी जमीन कारण पंजाब के किसानों का जार्जिया और अन्य देशों में खेतीबाड़ी करने का रुझान बढ़ रहा है। पंजाब के लगभग 300 परिवार जार्जिया में खेतीबाड़ी कर रहे हैं। इसमें ज्यादा मालवा क्षेत्र के किसान हैं। जार्जिया में खेती मजदूर के रूप में महिलाएं खेतों में पंजाबियों के साथ काम कर रही है।
खेतीबाड़ी विकास अफसर एवं स्टेट अवार्डी डा. जसविंदर सिंह बराड़ ने कहा कि जार्जिया देश का दौरा करके आए डा. बराड़ ने कहा कि वहां की जमीन उपजाऊ होने के कारण सब्जियां, फलदार पौधे, मक्की, सूरज मुखी आदि के लिए पूरी तरह फायदेमंद है, लेकिन उन्हें खेती से सहायक धंधे अपनाने की भी जरूरत है। डा. बराड़ ने दावा किया कि खेती लागत खर्चे पंजाब से अधिक आते है। उन्होंने किसानों को जागरूक करते कहा कि जार्जिया की वीजा प्रणाली बहुत ही आसान है।
डा. बराड़ ने खेती माहिर किसानों से खेती तकनीक संबंधी विचार संयुक्त किए। पंजाब एंड हरियाणा राज्य में खेती करने गए किसानों से भी उन्होंने बातचीत दौरान यह तथ्य सामने आए कि उनको खेती करनेके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है।
जार्जिया के कस्बा गारदाबानी में खेती कर रहे किसान मंजीत सिंह मोही ने कहा कि एजेंट जमीन के भाव संबंधी किसानों को गुमराह करके लूट करते हैं। खीता व लहसुन की खेती कर रहे किसान ने बताया कि उसने पांच हेक्टेयर जमीन तीन हजार अमेरिकी डालर प्रति हेक्टेयर कीमत से खरीद की तथा दो हजार डालर प्रति हेक्टेयर जमीन को खेती लायक बनाने पर खर्च आया है।
जिला फरीदकोट के गांव मचाकी मल सिंह के जगसीर सिंह सेखो व प्रदीप सिंह रत्तीरोड़ी ने बताया कि वह दो साल पहले भारत से अपने खेती औजार से खेती करने आए थे। 20 हेक्टेयर जमीन ठेके पर लेकर खेती शुरू की और वह बड़ी मुश्किल से गुजारा ही करते हैं। अब उन्होंने खेती के साथ डेयरी फार्मिंग आदि सहायक धंधे अपनाने के लिए फैसला किया है। जार्जिया की राजधानी तिबलसी में खेती कर रहे जिला मोगा के गांव कोटला मेहर सिंह वाला के पप्पू बराड़, भजन सिंह व बलजिंदर सिंह मधोके ने कहा कि जार्जिया में जमीन सस्ती होने कारण पंजाब के किसानों में जमीन खरीदने के बढ़े रुझान का एजेंट किसानों को गुमराह करके जमीन की खरीद-फरोख्त में लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं।
खेती माहिर डा. जसविंदर बराड़ ने किसानों को सलाह दी कि अगर वह जार्जिया खेती करने में रुचि रखते हैं तो उनको एजेंटों के चक्कर में पड़ने की जरूरत नहीं। जार्जिया की वीजा प्रणाली बहुत ही आसान है। उन्होंने कहा कि वहां खेतीबाड़ी जमीन के लिए 85 लारी (तीन हजार रुपये भारतीय कारंसी) प्रति हेक्टेयर टैक्स तथा 75 लारी प्रति हेक्टेयर नहरी पानी का मालिया भरना जरूरी है। डा. बराड़ ने दावा किया कि जार्जिया में फसलों के मंडीकरण, भंडारण की सहायता नहीं है। खेती लागत खर्चे पंजाब से अधिक आते हैं। खेती संबंधी 20 से 25 लारी प्रति दिहाड़ी मजदूर को अदा करने पड़ते हैं। बराड़ ने जार्जिया खेती करने जा रहे किसानों को सलाह दी कि वह ज्यादा जमीन रकबा खरीदने की बजाए रकबे थोड़े रकबे में खेती करें और सहायक धंधों को तरजीह दें।

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