ऑटो पार्ट्स उद्योग ने पकड़ा बाहर का रास्ता

Ludhiana Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब के ऑटो पार्ट्स उद्योग ने विस्तार के लिए अन्य राज्यों की सरजमीं को अपना ठिकाना बना लिया है। एक अनुमान के मुताबिक पिछले दो तीन साल के दौरान राज्य के पार्ट्स उद्यमियों ने करीब पंद्रह सौ करोड़ का निवेश अन्य राज्यों में किया है। आगे भी यही ट्रेंड बरकरार रहेगा। पार्ट्स उद्यमी ऑटो मोबाइल कंपनियों के प्लांटों के नजदीक अपनी पार्ट्स इकाइयां लगा रहे हैं। इनमें गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश और हरियाणा इत्यादि राज्यों को प्रमुखता दी जा रही है। उद्यमियों का तर्क है कि यदि पंजाब की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री को शिफ्टिंग से बचाना है तो राज्य में कम से कम एक बड़ा ऑटो मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कराना होगा।
काबिलेजिक्र है कि पंजाब में बन रहे सत्तर फीसदी से अधिक ऑटो पार्ट्स मार्केट में बिक्री किए जा रहे हैं। जबकि केवल तीस फीसदी पार्ट्स ही असली ऑटो मोबाइल निर्माताओं को आपूर्ति किए जा रहे हैं। अब निर्माता कंपनियां अपने प्लांट के निकट ही वेंडरों या पार्ट्स निर्माताओं को आमंत्रित कर रही हैं। इसी के चलते यहां की इकाइयां ऑटो मोबाइल क्लस्टर वाले राज्यों का रुख कर रही हैं।
प्रमुख ऑटो पार्ट्स निर्माता कंपनी न्यू स्वैन ऑटो ने हरियाणा के गुड़गांव, राजस्थान के भिवाड़ी में अपनी इकाइयां स्थापित कर दी हैं। अब गुजरात के सानंद में नई पार्ट्स इकाई लगाने की योजना पर काम चल रहा है। माहिरों का कहना है कि कभी पंजाब ऑटो पार्ट्स उद्योग का गढ़ था, लेकिन अब पंजाब में ऑटो मोबाइल निर्माताओं के न आने से यह उद्योग लगातार पिछड़ता जा रहा है।
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स के ज्वाइंट सेक्रेटरी उपकार सिंह कहते हैं कि बड़े प्लांट के अलावा राज्य में औद्योगिक नीतियां भी इंडस्ट्री फ्रेंडली नहीं हैं। इसके अलावा यहां पर उत्पादन लागत काफी अधिक आ रही है। इसीलिए उद्यमी अन्य राज्यों का रास्ता पकड़ रहे हैं।
उधर, आटो पार्ट्स मेन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रधान गुरपरगट सिंह काहलों का मानना है कि पिछले दो तीन साल में पंजाब के पार्ट्स उद्यमियों ने करीब पंद्रह सौ करोड़ का निवेश अन्य राज्यों में किया है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आगे भी यही रफ्तार जारी रहेगी।

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