शत्रु और पाप को छोटा न समझे : कमलानंद

Ludhiana Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
फरीदकोट। रोग, सांप, आग, शत्रु और पाप को कभी छोटा न समझो। रोग को प्रारंभ होते ही इलाज नहीं करेंगे तो असाध्य हो सकता है। सांप को छोटा समझकर छोड़ देंगे तो असावधानी में वह काट भी सकता है। आग को थोड़ा समझकर छोड़ देंगे तो वह भीषण रूप धारण करके पूरे नगर को भस्म कर सकती है। पाप चाहे थोड़ा ही हो आदत बढ़ने पर बढ़ता जाता है और महा पाप का रूप धारण कर लेता। दुश्मन को भी कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए। इसलिए इन पांचों चीजों को प्रारंभ में ही उखाड़कर फेंक देना चाहिए। यह विचार श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के अनंत श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि जी महाराज ने रोज इंक्लेव में देवी भागवत कथा के दौरान व्यक्त किए।
नवरात्र में मां वैष्णो, मां चिंतपूर्णी, मां चामुंडा, मां ज्वाला, मां नयना, मां मनसा जी की ज्योतियों के आने से पूर्व यहां यह भागवत कथा रखी गई है। कथा के पहले दिन स्वामी जी ने कहा कि नीम कड़वी होती है, पर सेवन करने वाले के शरीर में बीमारी नहीं आने देती। चीनी मीठी होती है, मगर अधिक सेवन करने से शुगर का खतरा बना रहता है। ऐसी ही दुख रहे तो जीवन में अहंकार का रोग नहीं आता। बल्कि जीवन तंदरुस्त और आध्यातमिकता बढ़ती जाती है। मनुष्य धार्मिक बनता जाता है। धन, ऐश्वर्य अधिक आए तो ईश्वर चिंतन कम हो जाता है। अंहकार रूपी शत्रु चोट करने लगता है। जीवन खराब हो जाता है। स्वामी जी ने कहा कि जो मां के चरणों का चिंतन करता है मां उसके अंग-संग रक्षक बनकर रहती है। जिसे हम बर्फ कहते हैं वह बर्फ पानी ही है। जिसे हम घड़ा कहते हैं वह मिट्टी ही है। जिस समुद्र में लहरें चलती हैं, वह लहरें मूल में पानी ही है। इसी प्रकार जीव भी मूल में ईश्वर ही है। कथा से पूर्व स्वामी जी का फरीदकोट पधारने पर श्रद्धालुओं द्वारा भव्य स्वागत हुआ।

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