40 साल बाद भी नहीं बनी यादगार

Ludhiana Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
मोगा। राज्य जन संपर्क विभाग की ढीली कार्रवाई के कारण करोड़ों रुपये कीमत की सिटी हार्ट स्थित ढाई कनाल में बनी इमारत (रीगल सिनेमा) खंडहर बन गया है। इस इमारत में बने प्रेस क्लब पर कब्जा कर लिया गया है। प्रशासन की अनदेखी के कारण इमारत पर कब्जे की कोशिशें जारी हैं। 26 साल पहले पंजाब सरकार ने इस इमारत को शहीदों की यादगार में तबदील करने का आश्वासन दिया था।
काबिलेजिक्र है कि 40 साल पहले 5 अक्तूबर 1972 को रीगल सिनेमा के प्रबंधकों की कथित धक्केशाही खिलाफ भड़के विद्यार्थियों ने सिनेमा को आग लगा दी थी। पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग, आंसू गैस, पानी की बौछारें एवं लाठियों से विद्यार्थियों को खदेड़ने की कोशिश करने पर मामला गोली कांड में बदल गया। गोली कांड में मास्टर केवल कृष्ण समेत चार विद्यार्थी हरजीत सिंह चड़िक, स्वर्ण सिंह चड़िक, गुरदेव सिंह की जान चली गई। इसके अलावा सैकड़ों शहरी व विद्यार्थी घायल हुए। जिससे शहर में कोहराम मच कर रह गया था। जिस पर स्थिति को कंट्रोल करने के लिए शहर में कई दिन कर्फ्यू लगाना पड़ा। उस समय के मुख्यमंत्री ज्ञानी जैल सिंह ने प्रशासन को बिना सूचित किए रात समय दौरा कर स्थिति का जायजा लेने बाद फरीदकोट के डिप्टी कमिश्नर एवं एसएसपी का तबादला कर दिया था। उस समय मोगा फरीदकोट जिले की सब डिवीजन थी।
दूसरी ओर पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन ने लगातार 14 साल संघर्ष कर सिनेमा चलाने के किए प्रयास नाकाम कर दिए थे। आखिरकार पंजाब सरकार और विद्यार्थी यूनियन में विद्यार्थियों की यादगार बनाने के लिए हुए समझौते तहत मार्च 1986 में सिनेमा वाली ईमारत की मालिकी लोक संपर्क विभाग को तबदील कर दी गई थी। उस समय राज्य के मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला थे।
इस इमारत में लोक संपर्क विभाग का दफ्तर भी रहा, लेकिन जिला प्रबंधकीय काम्पलेक्स बनने से यह दफ्तर भी तबदील हो गया और यादगारी लाइब्रेरी की होंद भी खत्म होकर रह गई। हालांकि लोक संपर्क दफ्तर जिला प्रबंधकीय काम्पलेक्स में तबदील होने कारण सरकार से मिली ग्रांट से प्रेस क्लब दफ्तर बनाया गया था, जिस पर अब किसी व्यक्ति ने कब्जा कर लिया है।

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