मजबूत होते रुपये ने छुड़ाए निर्यातकों के पसीने

Ludhiana Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। यूरोप एवं अमेरिकन बाजार में आर्थिक मंदी के बाद उत्पादन लागत में वृद्धि, करों के बढ़ते बोझ के बाद अब डालर के मुकाबले मजबूत हो रहे रुपये ने निर्यातकों के पसीने छुड़ा दिए हैं। पंजाब के निर्यातक भी इससे अछूते नहीं हैं। पिछले दो माह में डालर के मुकाबले रुपया करीब दस फीसदी तक मजबूत हो चुका है। इसके चलते निर्यातकों की तमाम योजनाआें पर पानी फिर गया है। हालत यह है कि अब उद्यमी ओवरसीज बाजार की चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं और फिलहाल वेट एंड वॉच की नीति पर चल रहे हैं। उनका तर्क है कि विपरीत परिस्थितियों में अब सरकार को आगे आकर निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष आर्थिक रियायतों का ऐलान करना होगा।
अगस्त माह के दौरान ही निर्यात में करीब दस फीसदी की गिरावट देखी गई है, जबकि आयात में लगातार इजाफा हो रहा है। निर्यात में गिरावट और आयात में उछाल देश के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को चुनौती दे रहा है। अगस्त माह में 22.3 अरब डालर का निर्यात किया गया है। जोकि पिछले साल समान अवधि के मुकाबले करीब दस फीसदी कम है। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल के पूर्व रीजनल चेयरमैन एससी रल्हन का कहना है कि इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट के निर्यात में करीब पंद्रह फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। देश से चालीस फीसदी से अधिक निर्यात यूरोपियन देशों को किया जा रहा है, लेकिन वहां पर मंदी के कारण खरीदार डिस्काउंट मांग रहा है। जबकि पिछले दो माह में उत्पादन लागत में पांच से दस फीसदी का इजाफा हुआ है। ऐसे में निर्यातकों को आर्डर लेने में दिक्कत आ रही है। साथ ही यह चिंता भी सता रही है कि आर्डर शिफ्ट होकर चीन को न चला जाए।
रल्हन ने कहा कि अब डालर के मुकाबले रुपया जुलाई में 57 के स्तर से भी उपर था, जोकि अब 52 के स्तर से भी नीचे चला गया है। इस तरह से निर्यातकों को दस फीसदी तक का झटका केवल करेंसी में आई मजबूती से ही लगा है। आने वाले दिनों में माहिर डालर के मुकाबले रुपये की कीमत पचास के आसपास का अनुमान लगा रहे हैं। इस स्थिति में निर्यातक के पास अब वेट एंड वॉच की नीति के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
रल्हन ने मांग की है कि सरकार करेंसी की मजबूती से हो रहे नुकसान की भरपाई निर्यातकों को करे। बैंक के ब्याज में राहत दी जाए और करों के रिफंड का पुख्ता इंतजाम किया जाए, तभी देश से निर्यात को बढ़ावा देकर चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित 360 बिलियन डालर का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।

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