मिलिंग नीति को लेकर कैरों से मिलेंगे उद्यमी

Ludhiana Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब में धान की खरीद राज्य सरकार के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है। राज्य में अनाज रखने के लिए भंडारण क्षमता की कमी, खरीद एजेंसियों के मुलाजिमों के रुख के साथ ही अब राज्य सरकार की नई मिलिंग नीति से नाखुश पंजाब के राइस मिलर्स ने भी आक्रामक तेवर अख्तियार कर लिए हैं। राज्य के 3500 मिलर्स ने साफ कर दिया है कि जब तक बैंक ब्याज, बैंक गारंटी की शर्तें नहीं हटाई जातीं, मिलों में धान का स्टॉक नहीं कराया जाएगा।
इस संबंध में पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के बैनर तले उद्यमियों का एक प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह पंजाब के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों से मुलाकात करेगा। इसके बाद ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
काबिलेजिक्र है कि पंजाब में चालू सीजन के दौरान लगभग 165 लाख टन धान की पैदावार होने की संभावना है। इसमें से 135 लाख टन धान की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा गया है। राज्य में एक अक्तूबर से धान की खरीद का काम शुरू हो चुका है, लेकिन हालत यह है कि खरीद सीजन के पहले तीन दिन में सरकारी एजेंसियों ने एक दाना भी धान की खरीद नहीं की है। यदि मिलर्स भी अपनी बात पर अड़े रहे तो सरकार के लिए धान को समेटना टेढ़ी खीर होगा, क्योंकि राज्य में कवर्ड एवं अनकवर्ड स्टोरेज क्षमता 200 लाख टन है। राज्य में इस वक्त 155 लाख टन गेहूं और 90 लाख टन चावल का स्टॉक मौजूद हैं। इसके अलावा पिछले साल का 20 से 25 लाख टन धान राज्य की राइस मिलों में पड़ा है।
पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी गुरदीप सिंह चीमा कहते हैं कि सरकारी गोदामों में जगह की कमी के कारण धान की मिलिंग समय पर नहीं हो पाती। सरकारी गलत नीतियों का खामियाजा मिलर्स कतई भुगतने को तैयार नहीं हैं। इसके अलावा लाखों करोड़ों रुपये की बैंक गारंटी देना मिलर्स के बस में नहीं है। चीमा ने साफ किया कि जब तक सरकार राहत नहीं देती धान लगवाने के एग्रीमेंट नहीं किए जाएंगे।

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