चालू सीजन की मिलिंग नीति से मिलर्स नाखुश

Ludhiana Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब सरकार द्वारा चालू सीजन के लिए घोषित नई मिलिंग नीति से राइस शैलर उद्यमी इत्तेफाक नहीं रखते। शैलरों में नया धान लगाने के एवज में सरकार को बैंक गारंटी देने, 31 मार्च के बाद बचे धान की रकम पर बैंक ब्याज के प्रावधान से मिलर्स सहमत नहीं हैं। मिलर्स ने सरकार को इन प्रावधानों पर फिर से विचार करके राहत देने की मांग की है। इसके अलावा मिलर्स ने सुझाव दिया है कि सरकार गेहूं की तर्ज पर धान का स्टॉक मिलों में क रने की बजाए अपनी कस्टडी में करे। मिलर्स को एडवांस राइस नीति के तहत धान देकर मिलिंग कराई जाए, इससे सभी झंझटों से छुटकारा हो जाएगा। फिलहाल मिलर्स सरकार के अगले रूख का इंतजार कर रहे हैं।
सरकार ने नई मिलिंग नीति के तहत एक टन तक की मिलिंग क्षमता वाले मिलर्स से तीस लाख रुपये, दो टन की क्षमता पर पचास लाख रुपये, तीन टन पर सत्तर लाख रुपये, चार टन पर नब्बे लाख रुपये, पांच टन पर 1.20 करोड़ रुपये और इससे अधिक की मिलिंग क्षमता वाले मिल मालिक से दो करोड़ रुपये की बैंक गारंटी की मांग की है। मिलर्स का तर्क है कि बैंक गारंटी देना संभव नहीं है। इसके अलावा मिलर्स का तर्क है कि सरकार के पास चावल रखने के लिए गोदामों में जगह का इंतजाम नहीं है। इसलिए धान की मिलिंग के काम में देरी हो रही है। हालत यह है कि पिछले सीजन का 14 लाख टन चावल अभी मिलर्स ने सरकार को जमा कराना है, जबकि गोदामों में जगह केवल 13 लाख टन चावल रखने की है। इस चावल की डिलीवरी 15 अक्तूबर तक देनी है, लेकिन गोदाम में जगह न होने के कारण इस पर भी आशंका है। इन हालात में 31 मार्च के बाद बैंक ब्याज देना भी संभव नहीं है। इस संबंध में कोई भी मिलर्स खुल कर सामने आने को तैयार नहीं है, फिलहाल वे वेट एंड वाच की नीति पर चल कर सरकारी रुख का इंतजार कर रहे हैं।
उधर राइस मिलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के स्टेट प्रेसिडेंट राकेश जैन ने सरकार को सुझाव दिया है कि गेहूं की तर्ज पर ही धान का स्टॉक भी सरकार अपने पास करे। मिलर्स को एडवांस राइस की नीति के तहत धान की आपूर्ति की जाए और उससे तैयार चावल लिया जाए। इस फार्मूले से तमाम समस्याओं का निपटारा हो जाएगा।

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