मुलाजिमों ने किया खरीद के बायकाट का ऐलान

Ludhiana Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब में एक अक्तूबर से धान की खरीद शुरू हो रही है। राज्य में तीस अक्तूबर तक 135 लाख टन धान की आमद होने की संभावना है। चिंता की बात यह है कि सरकारी खरीद एजेंसियों के मुलाजिमों ने अनिश्चितकाल के लिए धान की खरीद का बायकाट करने का ऐलान कर दिया है। मुलाजिम धान के मिलों में स्टॉक के दौरान शैलर मालिक और मुलाजिम की ज्वाइंट कस्टडी का विरोध कर रहे हैं। इसके खिलाफ तीन अक्तूबर को चंडीगढ़ में खरीद एजेंसियों की जबरदस्त रैली होगी। इसमें आगे की रणनीति का ऐलान भी किया जाएगा। मुलाजिमों के रूख को देखते हुए लगता है कि चालू सीजन के दौरान धान की खरीद में जबरदस्त हाय-तौबा मचने की संभावना है और किसान के खून पसीने से पैदा हुआ धान मंडियों में खराब हो सकता है।
काबिलेजिक्र है कि पंजाब में राज्य सरकार की एजेंसियां पनग्रेन, मार्कफैड, पंजाब वेयर हाउस, पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज और पनसप धान की खरीद करती हैं। धान खरीद में इन एजेंसियों के तीन हजार से लेकर 3500 मुलाजिम हिस्सा लेते हैं। मंडियों से खरीदा हुआ धान मिलिंग के लिए राइस शैलरों में स्टॉक किया जाता है। मिलिंग के बाद चावल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में स्टॉक होता है। लेकिन शैलर में स्टॉक किए धान पर मिलर्स के अलावा खरीद एजेंसी के मुलाजिमों की भी बराबर की जिम्मेदारी होती है। अब मिलों में माल गायब होने, चोरी होने की सूरत में मिल मालिक के साथ साथ मुलाजिम पर भी शिकंजा कस दिया जाता है। इसे लेकर खरीद एजेंसियों के मुलाजिम खफा हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में मुलाजिम कानूनी पचड़े में फंसे हुए हैं।
पंजाब स्टेट फूडग्रेन प्रोक्योरमेंट को-आर्डीनेशन कमेटी के स्टेट प्रेसिडेंट भूपिंदर सिंह कहते हैं कि सरकार की गलत नीतियों के कारण और ज्वाइंट कस्टडी के चक्रव्यूह में फंस कर एक हजार से अधिक मुलाजिमों के सरकारी भुगतान रूके हुए हैं। हालत यह है कि मुलाजिम को रिटायर होने के बावजूद भी सरकारी ड्यूज नहीं मिले हैं। खरीद के काम में जुटे करीब नब्बे फीसदी मुलाजिम सरकारी की गलत नीतियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। इस संबंध में सरकार को कई बार आग्रह किया गया है, लेकिन कोई हल नहीं निकल पा रहा है। इसलिए अब आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। भूपिंदर सिंह ने साफ किया है कि ज्वाइंट कस्टडी मुलाजिमों को किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है।

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