मुक्तसर में डेंगू के दो संदिग्ध केस मिले

Ludhiana Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
मुक्तसर। मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही मुक्तसर में एकबारगी फिर से डेंगू के डंक ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। डेंगू की दस्तक के साथ ही लोगों में इस बीमारी को लेकर चिंता तथा भय के बादल छाने लगे हैं। पिछले कुछ ही दिनों में मुक्तसर जिले में डेंगू के दो संदिग्ध केस सामने आए हैं। इनमें से एक मरीज लुधियाना के अपोलो अस्पताल में इलाज अधीन है। जबकि दूसरा मुक्तसर के ही एक निजी अस्पताल में दाखिल है। दोनों ही मरीजों के कार्ड टेस्ट पॉजिटिव पाए गए हैं।
गत मंगलवार की रात को गांव नंदगढ़ निवासी गुरप्रीत सिंह (32) कोटकपूरा रोड स्थित जिंदल अस्पताल में पहुंचा। उसे कई दिन से बुखार नहीं उतर रहा था। इस पर उसने गांव के ही एक आरएमपी डाक्टर की सलाह पर अपने प्लेटलेट्स सेल चेक करवाए थे। टेस्ट में प्लेटलेट्स सेल मात्र 25 हजार ही निकले। जिस पर उसे रात को जिंदल अस्पताल लाया गया। जहां बुधवार की सुबह उसका कार्ड टेस्ट किया गया तो उसमें डेंगू बुखार होने की पुष्टि हुई। इसके बाद अस्पताल में उसका इलाज शुरू कर दिया गया।
साथ ही अस्पताल के डा.सतीश जिंदल की ओर से स्वास्थ्य विभाग को इसके बारे में जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत मरीज का सैंपल लेकर फरीदकोट के गुरू गोबिंद सिंह मेडिकल कालेज एंड अस्पताल स्थित लैब को भेज दिया। इसके अलावा गुरू अंगद देव नगर निवासी 23 वर्षीय अर्शदीप सिंह पुत्र जसबीर सिंह पिछले तीन दिन से लुधियाना के अपोलो अस्पताल में उपचाराधीन है। उसे पहले स्थानीय कमरा अस्पताल में दाखिल कराया गया था। जहां पर उसका कार्ड टेस्ट किया गया था और यह कार्ड टेस्ट भी पाजिटिव निकला था। बाद में उसे लुधियाना के अपोलो अस्पताल में रेफर कर दिया गया।

पिछले साल जानलेवा साबित हुआ था डेंगू का डंक
मुक्तसर। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहीं इस बार भी किसी मरीज की जान न ले ले। पिछली बार की तरह अगर इस बार भी स्वास्थ्य विभाग ने हरकत में आने में देरी की तो डेंगू के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि डेंगू के मामले में गत वर्ष मुक्तसर राज्य में नंबर वन पर रहा था और मुक्तसर में डेंगू ने तेजी से पांव पसारे थे। डेंगू से करीब आधा दर्जन लोग डेंगू के चलते मौत के मुंह में चले गए थे। मगर स्वास्थ्य विभाग और नगर काउंसिल के उच्चधिकारी आंखें मूंदे कुंभकर्ण की नींद सोए रहे।

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