नशे के धंधे से जुड़ा है गांव का हर परिवार

Ludhiana Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
गांव दौलेवाला (मोगा)। पंजाब का एक पूरा गांव आज तस्करी के मामले में कुख्यात हो चुका है। पंजाब के मोगा जिले के अंतर्गत गांव दौलेवाला नशे की तस्करी के लिए प्रदेशभर में जाना जाता है। यहां हर परिवार नशे की तस्करी से जुड़ा है और परिवार के किसी न किसी सदस्य पर केस भी दर्ज हैं, इनमें महिलाओं की भागीदारी भी कहीं ज्यादा है।
गांव दौलेवाला में 400 घर हैं और पिछले पांच साल में विभिन्न थानों में 70 महिलाओं सहित 385 मामले दर्ज हैं। वर्तमान में गांव के 65 लोग सजा भुगत रहे हैं और दो दर्जन के करीब भगोड़े हैं। तस्करों का पंजाब के अलावा राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश तक नेटवर्क है। गांव के सरपंच रंजीत सिंह का कहना है कि पुलिस की ओर से सख्ती न करने पर गांव पर कलंक लगा है। एसएसपी सुरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि गांव में तस्करी पर अंकुश लगा है और तस्करों ने अपना ठिकाना बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अगर लोग नशे का यह धंधा छोड़ दें तो प्रशासन उन्हें रोजगार मुहैया करवाने का प्रयास करेगा।
हिंद-पाक बंटवारे के बाद पाकिस्तान से उजड़ कर आए राय सिख बिरादरी के लोग इस गांव में रहने लगेे। गांव में 75 प्रतिशत आबादी राय सिख, 15 प्रतिशत जट सिख एवं पांच प्रतिशत अन्य जातियों की है। आर्थिक बदहाली के कारण गांव के 75 प्रतिशत लोगों ने सबसे पहले शराब तस्करी का धंधा शुरू किया। इसके बाद वे भुक्की तस्करी का कारोबार करने लगे। भुक्की तस्करी पर पुलिस की नजर से बचने के लिए स्मैक एवं हेरोइन का धंधा भी चलाया जा रहा है। घर परिवार के पुरुषों के जेल में चले जाने से अब महिलाएं पुड़ियों में स्मैक एवं हेरोइन का धंधा पुलिस से बचकर कर रही हैं।
सूत्र बताते हैं कि स्मैक की एक पुड़ी 600 रुपये और हेरोइन की एक पुड़ी 1500 रुपये में बेचने का काम महिलाएं और बच्चे कर रहे हैं। पुलिस रिकार्ड के अनुसार इस गांव के लोगों के खिलाफ क्षेत्रीय थाना फतेहगढ़ पंजतूर में 51 महिलाओं सहित 140 तस्करी के केस दर्ज हैं। इसके अलावा महिलाओं खिलाफ 19 मामले अन्य पुलिस थानों में दर्ज हैं। 245 मामले पंजाब के विभिन्न थानों के अलावा राजस्थान, हरियाणा एवं मध्य प्रदेश में भी दर्ज है।

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