पंजाब के उद्यमियों ने पकड़ी गुजरात की राह

Ludhiana Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। सरकार की उद्योग विरोधी नीतियों के चलते अब उद्यमियों का पंजाब से मोह भंग हो गया है। राज्य के फास्टनर उद्योग ने अब गुजरात में शिफ्ट होने का मन बना लिया है। गुजरात में वहां की औद्योगिक नीतियों, सब्सिडी, वायबिलिटी की स्टडी के लिए 14 सितंबर को उद्यमियों का एक प्रतिनिधिमंडल अहमदाबाद जाएगा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व फास्टनर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट नरिंदर भमरा करेंगे। स्टडी के बाद गुजरात में उद्यमी फास्टनर का नया कलस्टर स्थापित करेंगे। पहले चरण में वहां पर करीब 450 उद्यमी तकरीबन 1000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।
एसोसिएशन के प्रसिडेंट नरिंदर भमरा ने कहा कि राज्य सरकार उद्योग जगत की बात सुनने को तैयार नहीं है। पंजाब में करीब एक हजार फास्टनर इकाइयां नट बोल्ट का उत्पादन कर रही हैं। इस उद्योग का सालाना कारोबार करीब चार हजार करोड़ रुपये है। इसमें से 25 फीसदी माल विदेशों में निर्यात किया जा रहा है। जबकि 75 फीसदी माल की खपत भारतीय बाजार में है।



शहरियों और उद्यमियों की सुनने वाला कोई नहीं
भमरा ने कहा कि पंजाब में शिअद वोट बैंक की राजनीति के तहत शहरियों पर करों का बोझ बढ़ा रहा है, जबकि ग्रामीणों को करों से मुक्त रखा जा रहा है। सरकार की सहभागी भाजपा भी मूकदर्शक होकर यह खेल देख रही है। इससे लगता है कि अब शहरियों और उद्यमियों की सुनने वाला राज्य में कोई नहीं है।

उद्यमियों की बैठक में हुआ विचार
उन्होंने बताया कि हालात पर चर्चा के लिए फास्टर उद्यमियों की बैठक बुला कर उद्यमियों की राय ली गई है। अधिकतर उद्यमियों ने यहां से शिफ्ट होने का मन बना लिया है। भमरा को अनुमान है कि तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद करीब एक साल में इंडस्ट्री गुजरात में कामकाज शुरू कर देगी। गुजरात से भी उद्योग लगाने के लिए सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं।


ये हैं दिक्कतें
-ई-ट्रिप के बाद अब संपत्ति कर और वैट में आधा फीसदी की वृद्धि
- राज्य में इंडस्ट्री के लिए न कच्चा माल और न ही सरकार का सहारा
-उत्पादन लागत भी अन्य राज्यों के मुकाबले महंगी
-बिजली संकट

पंजाब में इंडर्स्र्टी से जुड़े प्रमुख तथ्य

1000 फास्टनर इकाइयां
4000 करोड़ सालाना कारोबार
25 फीसदी उत्पाद का विदेशों में निर्यात

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