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पंजाब में 57 फीसदी कम हुई बारिश, सूखे के हालात

Ludhiana Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
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लुधियाना। मानसूनी सीजन में कम बारिश होने से पंजाब और हरियाणा में सूखे के हालात बन गए हैं। चालू सीजन में पंजाब में सामान्य से 57 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इस कम बारिश का सीधा प्रभाव धान की खेती पर दिखाई दे रहा है। पीएयू के मौसम विभाग के विशेषज्ञ डा. लखवीर सिंह धालीवाल, डा. गुरमीत सिंह बुट्टर और डा. परनीत कौर किंगरा के मुताबिक यहां कम बारिश से चलते धान की फसल सूख रही है। मौसम विज्ञानियों ने केंद्रीय मौसम विभाग की रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है।
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मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि केंद्रीय मौसम विभाग के मुताबिक 1875 से अब तक पंजाब में 25 साल सूखा पड़ा है और 37 वर्ष बाढ़ वाले रहे हैं। 21वीं सदी के शुरू में देश में सूखा बार-बार बढ़ रहा है। वर्ष 2009 में कम बारिश होना ताजा उदाहरण है। 1972 से अब तक वर्ष 2009 में मानसून सामान्य से 23 फीसदी कम रही है। 2002 से 2009 तक सूखे वाले वर्ष रहे हैं जिनमें कृषि प्रभावित हुई है। 2002 में सूखे के चलते 124 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई हो पाई थी।
डा. धालीवाल ने कहा कि मौसम में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, जिससे मानसूनी सीजन भी प्रभावित हो रहा है। देश के कुछ क्षेत्रों को छोड़ कर अन्य के हालात अच्छे नहीं है। पंजाब और हरियाणा में इसका सबसे अधिक प्रभाव हो रहा है। एक जून से 26 अगस्त तक पंजाब में 57 फीसदी कम बारिश हुई। सामान्य स्थिति में 384 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए लेकिन इस वर्ष मात्र 165 मिलीमीटर ही बारिश हो पाई है। इस मानसूनी सीजन में देश के 70 फीसदी हिस्से में सामान्य बारिश हुई है। 27 फीसदी में साधारण से कम और तीन फीसदी हिस्से में बहुत ही कम बारिश हुई है।

धान की फसल हो रही प्रभावित
वैज्ञानिकों के मुताबिक पंजाब और हरियाणा में धान की फसल मुख्य है। पानी की कमी के चलते फसल सूख रही है और किसान इसे बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे है। पंजाब के वेट इलाकों में नहरी पानी का कोई प्रबंध नहीं है, जिसके चलते हालात खराब हैं। दक्षिणी पंजाब में बहुत कम बारिश होने से फसल पूरी तरह से प्रभावित हो रही है।

बढ़ सकता है पानी की संकट
पंजाब में इस समय लगभग 14 लाख ट्यूबवेल चल रहे हैं। मानसून कमजोर रहने के चलते धान की सिंचाई के लिए धरती के निचले पानी का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है, जिससे आने वाले दिनों में यहां जल संकट गहरा सकता है। इसका मुख्य कारण में धान की खेती, सबमर्सिबल पंप, पानी की दुरुपयोग। माहिरों का कहना है कि पंजाब में तीस लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है।

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