फर्नेस मिलों के अड़गे से इंजीनियरिंग उद्यमी हलकान

Ludhiana Updated Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब की फर्नेस मिलों ने फै सला किया है कि इंजीनियरिंग उद्यमियों से स्क्रैप की खरीद पर 12.5 फीसदी सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी के साथ बिल लिया जाएगा। जो इकाइयां एक्साइज से छूट प्राप्त हैं, उनसे स्क्रैप ड्यूटी कम करके खरीदी जाएगी। इसके बाद छूट का लाभ ले रही इकाइयों में हड़कंप मच गया है। उद्यमियों का तर्क है कि उनको अब स्क्रैप बाजार के रेट से दो से चार रुपये प्रति किलो सस्ती बेचनी पड़ेगी। इससे इंजीनियरिंग उद्योग की प्लानिंग पर असर पड़ेगा। मिलों के इस फरमान का इंजीनियरिंग उद्यमियों ने विरोध करने का मन बनाया है।
काबिलेजिक्र है कि लघु उद्योग इकाइयों को सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में डेढ़ करोड़ रुपये तक की छूट मिली हुई है। ऐसे में अधिकतर छोटी इकाइयां ड्यूटी के दायरे में नहीं आती। इसके अलावा साइकिल एवं साइकिल पार्ट्स, कृषि उपकरण इत्यादि कुछ उद्योगों को सेंट्रल एक्साइज से छूट मिली हुई है।
फेडरेशन ऑफ पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट बदीश जिंदल कहते हैं कि छूट प्राप्त इकाइयां सेंट्रल एक्साइज का बिल नहीं काट सकती। इसलिए उनको स्क्रैप बाजार के भाव से दो से चार रुपये प्रति किलो तक सस्ता बेचना होगा। इससे छोटी इकाइयों के कारोबार पर विपरीत असर होगा। जिंदल ने कहा कि नट बनाने में 25 से तीस फीसदी तक, बोल्ट बनाने में दस फीसदी, साइकिल एवं पार्ट्स से पांच फीसदी तक स्क्रैप बनता है। इंजीनियरिंग उद्योग से निकलने वाले कुल स्क्रैप का चालीस फीसदी छूट प्राप्त इकाइयों से आ रहा है। जिंदल के अनुसार छूट प्राप्त इकाइयां भी स्टील खरीद के वक्त ड्यूटी अदा करती हैं। ऐसे में मिलों का आदेश जायज नहीं है।
उधर इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन ऑफ नार्दर्न इंडिया के प्रेसिडेंट केके गर्ग का कहना है कि छूट प्राप्त इकाइयों से स्क्रैप लेने पर मिलों को सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी का मॉडवेट क्रेडिट नहीं मिल पाता। इससे इकाइयों को नुकसान हो रहा है।

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