खेल सीजन को भुनाने में बिजली संकट का अड़ंगा

Ludhiana Updated Mon, 06 Aug 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब में जारी बिजली संकट से जहां किसान, आम आदमी बेहाल है, वहीं उद्यमियों को भी इससे करारा आर्थिक झटका लग रहा है। उत्पादन में लगातार गिरावट के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार मार पड़ रही है। हालत यह है कि घरेलू आर्डर अन्य राज्यों में और ओवरसीज आर्डर चीन समेत अन्य देशों में शिफ्ट हो रहे हैं। उद्यमियों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सालों से मार्केटिंग नेटवर्क को खड़ा करने पर की गई मेहनत बेकार साबित हो रही है।
राज्य की लेदर गुड्स इंडस्ट्री पर भी बिजली संकट का बुरा असर हो रहा है। हालत यह है कि ओलंपिक के बाद यूरोप अमेरिका में बाक्सिंग समेत कई खेलों का घरेलू सीजन शुरू हो रहा है, लेकिन यहां का उद्योग वक्त पर आर्डर का भुगतान करने में असमर्थ है। इन हालात से निकलने के लिए उद्यमियों को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। लेदर गुड्स के उत्पादन में पचास फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा रही है।
बाक्सिंग के लिए सामान बनाने वाली अग्रणी कंपनी यूनिवर्सल लेग गार्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश कुमार कहते हैं कि बीस अगस्त के बाद से इंग्लैंड, यूरोप के देशों में बाक्सिंग का घरेलू सीजन शुरू हो जाता है। इस सीजन के लिए हर साल पंजाब से बड़ी संख्या में बाक्सिंग ग्लव्ज एवं अन्य उत्पादों का निर्यात किया जाता है। लेकिन इस बार बिजली संकट के कारण उत्पादन नहीं हो पा रहा है। ऐेसे में आर्डर चीन समेत अन्य देशों को शिफ्ट हो रहा है। पहले आठ से दस सप्ताह में आर्डर की डिलीवरी हो रही थी, अब 12 से 14 हफ्तों का वक्त लग रहा है।
उधर पंजाब लेदर फेडरेशन के सलाहकार एसपीएस विर्क के अनुसार बिजली संकट के चलते आगामी विंटर सीजन में लेदर गारमेंट वक्त पर बाजार में पहुंचाना उद्योग के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। अब सरकार ने रोजाना 11 घंटे बिजली देने का फरमान जारी किया है। लेकिन इस अवधि में लेदर का प्रोसेस पूरा नहीं हो पाता। कच्चे लेदर से वेट ब्लू बनता है। वेट ब्लू से पिकल तक के प्रोसेस को सात घंटे का वक्त लगता है और इसे बीच में रोकना संभव नहीं है। इसके बाद पिकल से क्रोम टेनिंग तक के प्रेसेस में भी सात घंटे लगते हैं। इन दोनों प्रोसेस को यदि बीच में बंद कर दिया जाए तो लेदर के खराब होने का खतरा रहता है। मौजूदा हालात में इन प्रोसेस को पूरा करना टेढ़ी खीर है। अब ऐसे में इंडस्ट्री को पचास फीसदी ही उत्पादन मिल पा रहा है।

Spotlight

Most Read

Mahoba

मंडल में जीएसटी की कम वसूली देख अधिकारियों के कसे पेंच

कर चोरी पर अब होगी सख्त कार्रवाई-

19 जनवरी 2018

Related Videos

सरकारी बेरुखी ने बनाया इस गोल्ड मेडेलिस्ट को मजदूर

स्पेशल ओलिंपिक्स वर्ल्ड समर गेम्स-2015 में 2 स्वर्ण पदक विजेता 17 साल के चैंपियन साइक्लिस्ट राजबीर सिंह आजकल बदहाली में जी रहे हैं। राजबीर की ये बदहाली सरकार के खेलों को बढ़ावा देने के दावों की कलई खोल रही है।

27 दिसंबर 2017

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper