बिजली संकट के बाद अब डीजल के लिए मारामारी

Ludhiana Updated Sat, 04 Aug 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब में बिजली संकट के गंभीर होते ही जेरनेटरों के कान फोड़ू शोर ने जहां आम लोगों को परेशान कर रखा है, वहीं अब डीजल के लिए मारामारी भी शुरू हो गई है। इन दिनों कम बारिश और बिजली कटों के कारण कृषि के साथ साथ इंडस्ट्री, ट्रेड और घरेलू क्षेत्र में भी डीजल की मांग भी चरम पर पहुंच गई है। पेट्रोलियम उद्योग से जुड़े माहिर बताते हैं कि राज्य में डीजल की खपत बीस फीसदी तक बढ़ चुकी है। ऐसे में इसकी खरीदारी के लिए मारामारी भी बढ़ रही है। खासकर रोजाना चार-पांच सौ लीटर से अधिक की खपत करने वाली औद्योगिक इकाइयों को काफी पसीना बहाना पड़ रहा है। कई बार वक्त पर डीजल नहीं मिलने के कारण उत्पादन भी ठप हो रहा है। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) ने तेल कंपनियाें से मांग की है कि पंजाब में डीजल की आपूर्ति को बेहतर बनाया जाए।
पंजाब पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के स्टेट प्रेसिडेंट जेपी खन्ना का कहना है कि कंट्रोल्ड आइटम होने के कारण तेल कंपनियाें को प्रति लीटर डीजल पर 12.40 रुपये का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी के अधिकतर डीजल पंप ड्राई पड़े हैं। पंजाब में सामान्य दिनों में डीजल की रोजाना खपत नौ लाख लीटर रहती है जो कि अब बढ़कर साढ़े दस से 11 लाख लीटर के बीच पहुंच गई है।
काबिलेजिक्र है कि पंजाब में रोजाना आठ से दस घंटे का पावर कट लग रहा है। इंडस्ट्री में सप्ताह में चार दिन और तीन दिन का कट है। वहीं कृषि क्षेत्र को भी चार पांच घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इन हालात में इंडस्ट्री चलाने के लिए उद्यमी डीजल पर निर्भर हैं। ऐसे में उद्यमियों का स्टाफ डीजल के लिए ड्रम लेकर एक पंप से दूसरे पंप के चक्कर काट रहे हैं।
न्यू स्वैन आटो इंडस्ट्रीज के एमडी एवं सीआईसीयू के ज्वाइंट सेक्रेटरी उपकार सिंह कहते हैं कि उनकी इकाई में रोजाना पांच सौ लीटर डीजल की खपत है। डीजल के लिए स्टाफ दिन भर कोशिश करता है। हालत यह है कि दो दिन पहले समय पर डीजल नहीं मिलने से इकाई को एक घंटे से अधिक समय तक के लिए बंद करना पड़ा। इससे भी उत्पादन का नुकसान हो रहा है।
उधर, सुपरफाइन निटर्स के एमडी और फेडरेशन ऑफ निटवियर एंड टेक्सटाइल एसोसिएशन ऑफ लुधियाना के प्रेसिडेंट अजीत लाकड़ा कहते हैं कि उनकी इकाई में रोजाना चार सौ लीटर से अधिक डीजल की खपत हो रही है। डीजल के लिए कंपनी के लोग एक पंप से दूसरे के चक्कर लगा रहे हैं। रोजाना जरूरत के अनुसार डीजल हासिल करना भी बड़ा चैलेंज बन गया है।

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