मिड-डे-मील से अध्यापक करोड़ों के कर्जदार

Ludhiana Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
मानसा। मानसा जिले में मिड-डे-मील स्कीम ने अध्यापकों को एक करोड़ रुपये से अधिक कर्जदार कर दिया है। इस कारण दर्जनों स्कूलों में दोपहर का भोजन पकना बंद हो गया है।
जिले के अध्यापक कई माह से अपने स्तर पर पैसा खर्च करके इस स्कीम को चला रहे थे, लेकिन अब वह कर्जदार हो गए हैं। इस कारण उन्होंने बच्चों को खाना परोसने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ईटीटी अध्यापक यूनियन पंजाब ने 15 जुलाई से जिला मानसा के पंचायती राज के साथ संबंधित उन सभी स्कूलों में खाना बंद करने का ऐलान किया है जहां के अध्यापक मिड-डे-मील स्कीम के कारण कर्जदार हुए हैं। जत्थेबंदी के महासचिव हरदीप सिंह सिद्धू ने कहा कि बेशक इन बच्चों के हितों को लेकर अध्यापक लंबा समय इस स्कीम को चलाते रहे, लेकिन अब कर्ज का बोझ बढ़ गया है।
जिले में विभिन्न स्कूलों में खाना बंद होने के कारण इन स्कूलों में मिड-डे-मील वर्कर भी काम से वंचित हो गई हैं। वर्करों ने कहा कि पहले तो वह वेतन न मिलने से परेशान थीं, लेकिन अब स्कूलों में खाना बनना ही बंद हो गया है। अध्यापकों ने बताया कि पिछले समय से राशि न मिलने कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार सरकारी प्राइमरी स्कूल बोहा 40,000 रुपये, फरीदके 12000 रुपये, राम नगर भट्ठल 26800, गंढू कलां 12000, रल्ली 31000 रुपये, कलीपुर 18000 रुपये, लखवीरवाला 30,000 रुपये, शेखपुरा खुडाल 24000, रंघडियाल 30,000 रुपये, रिओद कलां 40,000 रुपये, गोरखनाथ 14000 रुपये व खुडाल कलां 24000 रुपये समेत अन्य कितने ही सरकारी स्कूलों के अध्यापक अपने पास से राशि खर्च कर चुके हैं। अध्यापक नेता जसवीर सिंह खुडाल, कुलविंदर सिंह बुढलाडा ने बताया कि वह 15 जुलाई के बाद उस समय तक खाना नहीं बनाएंगे जब तक उनका सभी बकाया नहीं दिया जाता। मिड-डे-मील के जिला मैनेजर एसके मित्तल ने कहा कि जिले में मिड-डे-मील के बकाया को पूरा करने के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक जरूरत है। उन्होंने कहा कि दो दर्जन के करीब स्कूलों ने राशि न मिलने के कारण खाना बंद करने के लिए लिखित तौर पर सूचित कर दिया गया है।

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