केटल फीड उद्योग को चाहिए कच्चे माल की खुराक

Ludhiana Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब से एक तरफ तो राइस ब्रान डी-आयल्ड केक (डीओसी) का दूसरे राज्यों को ट्रेडरों के मार्फत निर्यात करके बड़ी सोल्वेंट इकाइयां मोटा मुनाफा कमा रही हैं वहीं दूसरी तरफ राज्य की केटल फीड इंडस्ट्री (पशुचारा उद्योग) एक-एक बोरी राइस ब्रान डीओसी के लिए तरस रही है। हालत यह है कि इकाइयों को उनकी मांग का केवल 25 फीसदी ही माल मिल पा रहा है। नतीजतन राज्य की दो हजार केटल फीड इकाइयों का वजूद संकट में पड़ गया है। धान की फसल अक्तूबर में बाजार में आनी है। ऐसे में तीन-चार माह का वक्त कैसे गुजरेगा, यह सोचकर उद्यमी परेशान हैं।
उद्यमी दूसरे राज्यों से सस्ता डीओसी मंगवाने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि सरकार ने इस पर पांच फीसदी एंट्री टैक्स लगा रखा है। इन हालात में इकाइयों को ताले लगाने के अलावा उद्यमियों के पास कोई विकल्प नहीं है। परेशान उद्यमियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि राइस ब्रान डीओसी के दूसरे राज्यों में निर्यात पर अक्तूबर तक रोक लगाई जाए। साथ ही दूसरे राज्यों से केटल फीड के कच्चे माल के आयात पर लगा एंट्री टैक्स तुरंत हटाया जाए।
काबिलेजिक्र है कि केटलफीड का 80 फीसदी कच्चा माल राइस ब्रान डीओसी है। उद्यमियों का आरोप है कि इसकी किल्लत जानबूझकर पैदा की जा रही है। नतीजतन डीओसी के दाम 400 रुपये प्रति क्विंटल से उछलकर आठ सौ रुपये हो गए हैं। बावजूद इसके इकाइयों को माल नहीं मिल रहा है क्योंकि साल्वेंट प्लांट गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र्र प्रदेश, तमिलनाडु डीओसी भेज रहे हैं। उद्यमियों का दावा है कि पिछले एक माह में करीब 50 हजार टन डीओसी अन्य राज्यों को भेज रहे हैं जबकि पंजाब में इसकी भारी कमी है।
आल पंजाब केटल फीड मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी नरेश मेहता का कहना है कि मौजूदा स्थिति से निपटना उनके बस से बाहर हो रहा है। डीओसी के अलावा सोया के दाम भी दो माह में 20 हजार रुपये से बढ़कर 40 हजार रुपये हो गए हैं। जबकि सरसों डीओसी के दाम 12 रुपये किलो से बढ़कर 20 रुपये हो गए हैं। सरसों डीओसी का भी श्रीलंका और बंाग्लादेश को निर्यात किया जा रहा है। मेहता का कहना है कि जिस तरह से कच्चे माल की किल्लत हो रही है, आने वाले कुछ दिनों में केटल फीड इकाइयों को बंद करना पड़ सकता है। ऐसी सूरत में दूध के दाम 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकते हैं।

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