सीएम के जिले में बच्चे के इलाज को भटकती रही मां

Ludhiana Updated Wed, 11 Jul 2012 12:00 PM IST
मुक्तसर। प्रदेश सरकार और सेहत विभाग बेशक राज्य में बेहतर सेहत सुविधाएं मुहैया करवाने के दावे करें लेकिन मरीजों को इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में भटकते देखा जा सकता है। सोमवार को देर शाम मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के जिले मुक्तसर में गिदड़बाहा विधानसभा हलके के सरकारी अस्पताल में ऐसा ही वाकया देखने को मिला।
गिदड़बाहा के गुरु तेग बहादुर नगर की गली नंबर दो निवासी सुनीता पत्नी लखविंदर सिंह का डेढ़ साल का बच्चा सोमवार की शाम घर में ही खेलते समय पानी की बाल्टी में जा गिरा। बच्चे के नाक और मुंह में पानी भर जाने से उसकी हालत गंभीर हो गई। सुनीता अपनी ननद के साथ बच्चे को तुरंत इलाज के लिए सरकारी अस्पताल गिदड़बाहा लेकर पहुंची। इस दौरान अस्पताल में ही बच्चे को उल्टी-दस्त होने लगे। मगर अस्पताल में डाक्टरों के न होने से करीब आधा घंटा तक किसी ने उसकी सुध नहीं ली।
बच्चे की मां सुनीता ने बताया कि अस्पताल के कर्मचारी पहले तो उन्हें कुछ देर में डाक्टर के आने का भरोसा देते रहे लेकिन काफी देर तक जब डाक्टर नहीं पहुंचे तो उन्हें बच्चा वापस घर ले जाने को कह दिया गया। वहां मौजूद एंबुलेंस नंबर 108 के चालक ने भी उनकी एक न सुनी और गाड़ी धोने की बात कहकर टाल दिया। आननफानन में वे बच्चे को शहर के निजी अस्पताल में लेकर गईं और वहां इलाज शुरू करवाया। इसके बाद बच्चा अब स्वस्थ है।

बच्चे को मृत घोषित करने का आरोप
सुनीता ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों ने तो बच्चे को मृत ही घोषित कर दिया था। अगर वे जरा देर और वहां खड़ी रहतीं तो सचमुच ही बच्चे की जान जा सकती थी। उधर, मंगलवार को सुबह पीडि़त परिवार ने सिविल सर्जन दफ्तर मुक्तसर पहुंचकर सिविल सर्जन डा. सुखपाल सिंह से मुलाकात कर शिकायत सौंपी और गैरहाजिर डाक्टर, संबंधित स्टाफ व जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

गिदड़बाहा अस्पताल में डाक्टरों की कमी
गिदड़बाहा सरकारी अस्पताल में काफी समय से डाक्टरों की कमी है। इससे मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। गंभीर हादसों में अस्पताल पहुंचने वाले घायलों को अकसर किसी और अस्पताल में रेफर करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है। कई बार अस्पताल में डाक्टरों व स्टाफ की कमी की मांग उठाई जा चुकी है। गिदड़बाहा के कांग्रेस विधायक अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने भी इस मामले में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से मुलाकात कर अस्पताल में स्टाफ की कमी पूरी करने की मांग की थी। लेकिन इसके उलट कुछ ही दिन में दो और डाक्टरों के पद खाली हो गए। बताते हैं कि मुख्यमंत्री क ा जिला होने के कारण इलाज में राजनीतिक दबाव के चलते कोई डाक्टर यहां टिकने को राजी नहीं है।

कोट---
यह सही है कि अस्पताल में डाक्टरों की कमी है। फिलहाल पीडि़त परिजनों की शिकायत ले ली गई है। इस संबंध में जांच करवाने के बाद ही जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
- डा. सुखपाल सिंह, सिविल सर्जन मुक्तसर

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