मजबूत होते रूपये से आयातकों का नुकसान घटा

Ludhiana Updated Wed, 04 Jul 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। केंद्र सरकार के उपायों के बाद रुपये की मजबूती से आयातकों ने राहत की सांस ली है। कुछ ही दिनों में डालर के मुकाबले रुपये की कीमत 57.11 के स्तर से करीब चार फीसदी मजबूत होकर 54.75 के स्तर पर पहुंच गई है। इससे जहां आयातक राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं निर्यातक अपनी ओवरसीज मार्केटिंग रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। उधर, माहिरों का अनुमान है कि आने वाले कुछ दिनों में डालर के मुकाबले रुपये की कीमत 52 के स्तर पर आ कर ठहर सकती है। ऐसे में निर्यातकों ने वेट एंड वॉच की नीति को भी अपना लिया है।
ऑल इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन में पंजाब चैप्टर के चेयरमैन संदीप जैन के अनुसार स्टील इंडस्ट्री अपनी खपत का करीब अस्सी फीसदी स्क्रैप आयात करती है। आयात में आर्डर से लेकर डिलीवरी तक तीन माह का समय लगता है। इंडस्ट्री ने अब 52 रुपये पर आर्डर बुक किया था, उसकी डिलीवरी अब आ रही है। ऐसे में इंडस्ट्री को 57.11 की बजाए अब 54.75 के हिसाब से भुगतान करना पड़ रहा है। लिहाजा आयातकों का नुकसान चार फीसदी तक कम हो गया है। जैन ने कहा कि रूपये की मजबूती को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्क्रैप की कीमत 390 डालर से उछल कर 410 डालर पर पहुंच गई है। इससे रुपये की मजबूती का असर एक तरह से न्यूनतम हो गया है।
उधर प्रमुख निर्यातक एवं ईईपीसी के पूर्व रीजनल चेयरमैन एससी रल्हन कहते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में उद्यमी वेट एंड वाच की नीति पर चल रहे हैं। रुपये की मजबूती के रुख को देखते हुए नए आर्डर लेने में दिक्कत आ रही है। मौजूदा परिस्थितियों में निर्यात लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो रहा है। माहिर आने वाले पंद्रह बीस दिनों में डालर के मुकाबले रुपये की कीमत 52 के स्तर पर आने का अनुमान है। दूसरे निर्यातक उत्पादों पर डिस्काउंट को खत्म कर रहे हैं। पहले कमजोर हो रहे रुपये के चलते विदेशी खरीदार को पांच फीसदी तक का डिस्काउंट दिया जा रहा था। रल्हन ने कहा कि अब करेंसी में स्थिरता आने के बाद ही खुल कर कारोबार किया जाएगा।

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