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मानसून में देरी हुई तो धान बचाना मुश्किल

Ludhiana Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST
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लुधियाना। जून माह में बारिश नहीं होने और मानसून की सुस्त चाल के चलते सूबे के अन्नदाता के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ पढ़ी जा रही हैं। उधर, मौसम विभाग के माहिरों ने मानसून में एक सप्ताह और देरी की भविष्यवाणी की है। नतीजतन किसानों को ट्यूबवेल चला कर जमीनी पानी के जरिए धान की फसल को बचाना पड़ रहा है। इससे जहां किसानों की लागत दस फीसदी तक बढ़ गई है, वहीं कृषि माहिरों ने चेताया है कि किसी भी सूरत में कम पानी के कारण धान के खेत में तरेड़ें नहीं पड़नी चाहिए, यदि ऐसा हुआ तो स्थिति हाथ से निकल सकती है। क्योंकि खेत में तरेड़े पड़ने के बाद पानी फसल को लगने की बजाए सीधा नीचे चला जाता है। इससे फसल का झाड़ कम हो सकता है।
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दरार आई तो फसल बचना मुश्किल : मुख्तियार
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा विभाग के डायरेक्टर डा. मुख्तियार सिंह गिल कहते हैं कि कम बारिश के बावजूद किसानों ने ट्यूबवेल के जरिए जमीनी पानी से धान की फसल की बुआई तो लगभग पूरी कर ली है, लेकिन अधिक मात्रा में निकला जमीनी पानी पूरा करने में कई साल का वक्त लग जाएगा। गिल के अनुसार नहरी पानी वाले क्षेत्रों में फसल की स्थिति बेहतर है। बाकी क्षेत्रों में फसल पर दबाव देखा जा रहा है। अधिक दिनों तक बारिश न होने की सूरत में खेत में नदीन उग सकते हैं, नदीन नाशक दवाइयों का असर कम हो सकता है। खेत में तरेड़ भी आ सकती है। यह काफी खतरनाक है।
लागत में हो रहा इजाफा :
पीएयू के एग्रीकल्चर मेट्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डा. जीएस बूट्टर का कहना है कि वक्त पर बारिश नहीं आने से किसान की लागत में इजाफा हो रहा है। किसानों को जेनरेटर में डीजल फूंक कर धान की फसल को बचाना पड़ रहा है। अब बारिश का और लेट होना नुकसानदायक हो सकता है।
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और कर्ज में डूबेंगे किसान : राजेवाल
भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल का तर्क है कि धान की फसल पंजाब पर भारी पड़ रही है। बारिश न होने से किसान को अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इससे जहां किसान की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है, वहीं पंजाब का जमीनी पानी भी खतरनाक स्तर पर नीचे चला गया है। पिछले साल के मुकाबले राज्य में पानी का स्तर पांच फीसदी और गिर गया है। यदि बारिश न हुई तो यह 25 फीट तक नीचे जा सकता है। क्योंकि धान की अधिकतर बीजाई जमीनी पानी से ही की जा रही है। मौजूदा स्थिति में पंजाब का किसान और कर्ज में डूबेगा। इस संबंध में सरकार को शीघ्र ही सोचना होगा।
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पर्यावरण को खतरा
-राज्य में 29 फीसदी कृषि क्षेत्र नहरी पानी के तहत है, जबकि बाकी 71 फीसदी कृषि ट्यूबवेलों के जरिए जमीन के नीचे से पानी लेकर की जा रही है। ऐसे में वक्त पर मानसून आना भी अहम है। अन्यथा ट्यूबवेलों के जरिए जमीनी पानी का इस्तेमाल बढ़ जाता है। इससे पर्यावरण को बड़ा खतरा हो सकता है।

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