सुरजीत ने घर वालों के साथ जेल में गुजारे पलों को सांझा किया

Ludhiana Updated Sat, 30 Jun 2012 12:00 PM IST
मुक्तसर। लाहौर की कोट लखपत जेल की काल कोठरी में 30 साल गुजारने के बाद सुरजीत के घर लौटने की खुशी में परिजनों की आंखों की नींद उड़ गई थीं। वीरवार की रात बातों में ही कट गई।
‘अमर उजाला’ के साथ बातचीत में सुरजीत सिंह ने बताया कि खुशी के मारे वह रात भर सो न सका। पूरी रात घर और गांव वालों से बात करते कट गई। उसने कहा कि वह रात भर पारिवारिक सदस्यों के साथ पाकिस्तान जेल में बिताए पलों को सांझा करता रहा।
सुरजीत सिंह ने कहा कि वह परमात्मा का शुक्रगुजार है, जिसकी बदौलत आज वह अपने वतन और गांव की मिट्टी को नमन कर रहा है। इतने वर्षों बाद उसे अपने गांव पहुंचकर बहुत खुशी हुई है। उसके भी ज्यादा खुशी उसे अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ मिलकर हुई है। वर्षों बाद परिजनों के साथ मिलकर तथा उनसे बातें कर उसे इस वक्त जो खुशी महसूस हो रही है वह उसके बारे में शब्दों में बयान ही नहीं कर सकता। कई वर्षों के बाद वह अपने परिवार के साथ बैठकर खाना खाने का आनंद लिया और दिल खोलकर बातें कीं।
बधाई देने वालों का तांता
सुरजीत सिंह की रिहाई की खुशी में जश्नों का दौर शुक्रवार को भी जारी रहा। सारा गांव सुरजीत के रिहा होने की खुशी में झूमता नजर आ रहा है। रात भर गांव फिड्डे में दीवाली जैसा माहौल बना हुआ था। वीरवार देर शाम से बधाई देने का शुरू हुआ सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। सुरजीत के आने की खुशी में फिड्डे गांव रातभर पटाखों और आतिशबाजी के शोर गूंजता रहा।
पिता का प्यार पाकर भावुक हुई परमिंदर
सुरजीत सिंह की मुक्तसर जिले के गांव सूरेवाला में विवाहित बेटी परमिंदर कौर पिता प्यार पाकर भावुक हो उठी। परमिंदर कौर ने बताया कि 30 वर्षों के वियोग के बाद उसने पिता का प्यार पाया है। उसने बताया कि पाकिस्तान से छूटकर वतन लौटने पर जब उसने पहली बार अपने पिता को ‘पापा जी’ कहा तो पिता ने गले लगाते हुए सिर पर हाथ फेर आशीर्वाद दिया। वह इस पल को अपने जीवन का यादगार पल मानती हैं। परमिंदर ने बताया कि उसके पिता ने उसे बेटी कहकर पुकारते हुए पहली बार में ही पहचान लिया था।

विकलांग बहन सुबह से कर रही थी इंतजार
वीरवार सुबह से ही भाई इंतजार में बैठी सुरजीत की विकलांग बहन की आंखें वर्षों बाद अपने भाई को देखकर भर आईं। सुरजीत ने भी आगे बढ़कर चारपाई पर बैठी बहन कपूरा को गले से लगा लिया। दोनों भाई-बहन की आंखों से आंसू छलक आए। इस पल को देखकर उपस्थित लोगों की आंखें भी नम हो गईं। इसके बाद सुरजीत सिंह ने इंतजार में बैठी अपनी छोटी बेटी रानी को गले से लगाया और उसका हालचाल पूछा।
दोस्तों के साथ बिताये पल को याद कर भावुक हो उठे
पाकिस्तान की जेल से वर्षों बाद छूटकर अपने गांव फिड्डे पहुंचे सुरजीत सिंह उर्फ मक्खन सिंह अपने परिजनों तथा पुराने दोस्तों से मिलकर भावुक हो उठे। सुरजीत गांव के बुजुर्गों तथा अपने पुराने मित्रों से रूबरू हुए। इस दौरान सुरजीत सिंह तथा उनके मित्रों ने अपने पुराने दिनों की यादें ताजा कीं। बातों ही बातों में सुरजीत सिंह के पुराने मित्र मग्घर सिंह ने बताया कि सुरजीत सिंह जवानी के दिनों में लोगों के विवादों को निपटाने में सबसे आगे रहता था। जब भी गांव में कोई लड़ाई या झगड़ा होता था तब सुरजीत सिंह बीच में पड़कर दोनों पक्षों में राजीनामा करवाता था।

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