सरकारी नीतियों के बाद अब पावरकट की मार

Ludhiana Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब का राइस मिलर्स उद्योग सरकार की गलत नीतियों से पहले ही आर्थिक संकट की मार झेल रहा है, वहीं अब रही कसर पावर कट ने पूरी कर दी है। सप्ताह में दो दिन के पावर कट से मिलिंग का काम प्रभावित हो रहा है। उद्यमियों का तर्क है कि जैसे-जैसे धान की मिलिंग में देरी हो रही है, चावल की क्वालिटी देना उतना ही मुश्किल साबित हो रहा है। पहले से ही करीब 35 फीसदी धान की मिलिंग का काम बकाया पड़ा है। उधर मिलिंग के लिए समय सीमा तीस जून को खत्म हो रही है। सरकार ने अभी तक इसमें इजाफा नहीं किया है। पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि मिलिंग की अवधि तीस जून से बढ़ा कर 31 दिसंबर की जाए।
काबिलेजिक्र है कि पंजाब में पिछले सीजन के दौरान करीब 140 लाख टन धान की आमद हुई। सरकार ने धान की खरीद के बाद इसे राइस शैलरों में मिलिंग के लिए लगवा दिया। चावल रखने के लिए गोदामों में जगह की कमी के चलते मिलिंग का काम पहले ही धीमा चल रहा था। अब पिछले कुछ हफ्तों से लगे दो दिन के पावर कट ने स्थिति को और विकट बना दिया है।
पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के महासचिव गुरदीप सिंह चीमा कहते हैं कि राज्य की मिलें तीन माह में 140 लाख टन धान की मिलिंग करने की क्षमता रखती हैं। पर पावर कट के चलते दो दिन में करीब तीन लाख टन की मिलिंग नहीं हो पा रही है। चीमा ने कहा कि दो दिन के पावर कट से उद्योगों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उधर यदि तीन जून के बाद मिलिंग की अवधि में इजाफा न हुआ तो राज्य के राइस शैलरों में उत्पादन पूरी तरह से ठप हो जाएगा। चीमा ने आरोप लगाया कि अनाज की सुस्त मूवमेंट के कारण ही मिलिंग धीमी चल रही है।

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