‘मन के मालिक बनो तभी मिलेगा सुख’

Ludhiana Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
मानसा। एसएस जैन सभा की ओर से मंगलवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते प्रदीप रश्मि जी ने कहा कि मनुष्य का मन बड़ा चंचल है। मन ही आत्मा के बंधन और उत्थान का कारण है। वानर को बहुत चंचल कहा गया है, लेकिन मन उससे भी अधिक चंचल है क्योंकि वानर तो रात सो जाता है लेकिन मन दिन रात अविराम गति से दौड़ता है। इसलिए अर्जुन ने कृष्ण से शिकायत की कि जैसे वायु को मुट्ठी में बांधना मुश्किल है वैसे ही मन को काबू में रखना बहुत मुश्किल है। इस पर श्री कृष्ण ने कहा कि चंचल होने पर भी मन को वैराग्य और अभ्यास से वश में किया जा सकता है। उन्होंने कहा मन के गुलाम नहीं, मन के मालिक बनो तभी तुम्हें सुख मिलेगा। मन वहां टिक जाता है जहां मन का रस होता है। माला फेरने में मन नहीं लगता लेकिन रुपये गिनने में मन लगता है यदि मन को लगाना चाहते हो तो भक्ति में तो उसके प्रति पहले रस पैदा करो।

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