होजरी का उत्पादन तीस फीसदी गिरा

Ludhiana Updated Wed, 20 Jun 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। गर्मी की तपिश के बीच पंजाब में पावर संकट के चलते जहां आम आदमी का बुरा हाल है, वहीं सप्ताह में दो दिन का पावर कट लागू होने से उद्योग जगत का पहिया भी रुक गया है। पंजाब की आर्थिक राजधानी का प्रमुख उद्योग होजरी भी पावर संकट से बेहाल है। उद्यमियों का अनुमान है कि एक दिन के पावर कट से उद्योग में करीब पचास लाख पीस का उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जबकि लगभग पचास करोड़ रुपये का प्रोडक्शन लॉस हो रहा है। उद्यमियों ने सरकार से आग्रह किया है कि राज्य में बिजली संकट को खत्म करने के लिए ठोस उपाय किए जाएं।
काबिलेजिक्र है कि पावर कट के दौरान जेनरेटर पर उत्पादन खर्च दोगुना पड़ रहा है। दो दिन पावर कट के दौरान लगातार 48 घंटे के लिए जेनरेटर चलाना संभव नहीं है। वहीं सभी प्रोसेस जेनरेटर पर करना संभव नहीं है। ऐसे में इंडस्ट्री के उत्पादन में तीस फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा रही है। वूलेन उद्योग ने मई में आर्डर बुक करके उसके मुताबिक उत्पादन शेड्यूल तैयार किया गया था, लेकिन अब पावर कट के कारण शेड्यूल को बदलना पड़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि सर्दी सीजन के गारमेंट की डिलीवरी सितंबर में शुरू हो जाती है। यदि बिजली की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो डिलीवरी एक माह तक लेट हो सकती है। इसके अलावा बड़ी रिटेल चेन के आर्डरों का भुगतान समय पर नहीं होने से आर्डर कैंसिल होने के अलावा जुर्माना भी लग सकता है या अधिक डिस्काउंट देना पड़ सकता है। इससे उद्यमियों का आर्थिक नुकसान अलग से होगा।
निटवियर, अपैरल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ लुधियाना (कमल) के प्रेसिडेंट सुदर्शन जैन का कहना है कि एक दिन के पावर कट से उद्योग में लाखों पीस का उत्पादन नहीं हो रहा है और करोड़ों रुपये के उत्पादन का नुकसान हो रहा है। साथ ही सरकार को भी बिजली से मिलने वाले राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस चक्रव्यूह से निकलने का उद्यमियों को कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। जैन ने कहा कि पावरकॉम के चेयरमैन ने गर्मी सीजन को पावर कट मुक्त रखने की बात कई बैठकों में की, इसके बावजूद उद्योग कटों से बेहाल हैं।
वहीं निटवियर क्लब के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट राजिंदर भूषण मैनी कहते हैं कि पावर कट के चलते होजरी उद्योग में उत्पादन बुरी तरह से ठप हो गया है। लाखों की संख्या में वर्कर सप्ताह में दो दिन बेकार हो रहे हैं। पहले से ही मंदी की मार झेल रही इंडस्ट्री पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। यदि स्थिति में शीघ्र ही सुधार नहीं हुआ तो इंडस्ट्री बदहाली के कगार पर आ जाएगी।

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