रोजाना 40 हजार का डीजल फूंक रहे उद्यमी

Ludhiana Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। पंजाब में जारी पावर संकट के चलते उद्योगों की रफ्तार को ब्रेक लग गया है। सप्ताह में 48 घंटे के बिजली ऑफ-डे से निर्यातक बेहाल हो रहे हैं। उनकी उत्पादन लागत में तीन से दस फीसदी तक का इजाफा हो गया है। उत्पादन शेड्यूल को बरकरार रखने के लिए उद्यमी पावर कट के दौरान जेनरेटर चला रहे हैं, जिससे दस से लेकर चालीस हजार रुपये तक का डीजल फूंक रहे हैं। इन सब के पीछे एक ही मकसद है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद विदेशी आर्डर के भुगतान में कोई दिक्कत न आए और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यातकों की छवि साफ बनी रहे।
मौजूदा हालात को देखते हुए निर्यातकों ने नए विदेशी आर्डरों पर डिलीवरी टाइम को 40-45 दिन से बढ़ाकर पचास से साठ दिन तक कर दिया है। निर्यातकों ने साफ किया है कि सरकार ने यदि बिजली संकट पर काबू नहीं पाया तो उनको अन्य राज्यों में ठिकाने तलाशने होंगे।
गौरतलब है कि पंजाब से सालाना 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया जाता है। इसमें से आठ हजार करोड़ से अधिक का निर्यात केवल इंजीनियरिंग उत्पादों का होता है, लेकिन सप्ताह में लग रहे दो दिन के पावर कट ने निर्यातकों की हालत खराब कर दी है।
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल (ईईपीसी) के पूर्व रीजनल चेयरमैन एससी रल्हन कहते हैं कि बिजली की कमी के चलते सारा शेड्यूल गड़बड़ा गया है। उन्होंने कहा कि डीजल फूंककर उत्पादन कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। छोटी इकाइयों को प्रति दिन दस हजार रुपये और मध्यम दर्जे की इकाइयों को रोजाना 35 से चालीस हजार रुपये का डीजल खरीदना पड़ रहा है। बावजूद इसके इकाइयों से पूरा उत्पादन लेना संभव नहीं दिख रहा है।
उधर, चैंबर ऑफ अपैरल निटवियर एंड टेक्सटाइल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अजीत लाकड़ा कहते हैं कि अमेरिका और यूरोप में मंदी के चलते पहले से ही गारमेंट के आर्डर कम हैं। पावर कट के चलते अब उनको भी समय पर पूरा करना मुश्किल हो रहा है। लाकड़ा ने कहा कि आर्डर देरी से तैयार होने पर उनको शिप की बजाए एयर से लिफ्ट करना पड़ता है। ऐसी सूरत में निर्यातक का सारा प्राफिट खत्म हो जाता है। उनका कहना है कि पावर कट के कारण उत्पादन लागत मेें औसतन दस फीसदी का इजाफा हो गया है। इसे मैनेज करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

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