साइकिल उद्योग को रोज 22 करोड़ की चोट

Ludhiana Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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लुधियाना। गरमी बढ़ने के साथ ही पंजाब में बिजली संकट गहरा गया है। प्रदेश में पावरकॉम ने उद्योगों पर हफ्ते में 48 घंटे का पावरकट लागू कर दिया है। इससे राज्य के तमाम उद्योगों की प्रोडक्शन प्लानिंग चौपट हो गई है। अब उद्यमी पावरकट को ध्यान में रखकर अपने उत्पादन को नए सिरे से शेड्यूल करने में जुट गए हैं। हफ्ते में दो दिन के पावरकट ने साइकिल उद्योग को पटरी से उतार दिया है। अब इस उद्योग को रोज करीब 22 करोड़ रुपये का प्रोडक्शन का नुकसान हो रहा है। आर्डरों के भुगतान में भी दिक्कतें आने लगी हैं। साइकिल उद्यमियों ने सरकार से मांग की है कि अधिकृत औद्योगिक क्षेत्रों को पावरकट से मुक्त किया जाए।
काबिलेजिक्र है कि लुधियाना में रोजाना 45 हजार से अधिक साइकिलों का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा करोड़ों रुपये के साइकिल पार्ट्स तैयार किए जा रहे हैं। बिजली नहीं मिलने से हफ्ते में दो दिन उत्पादन ठप हो रहा है। जेनरेटर पर इकाइयों को चला पाना आर्थिक रूप से संभव नहीं है। जेनरेटर पर करीब नौ रुपये प्रति यूनिट खर्च आता है और जेनरेटर के रखरखाव का खर्च अलग से। अब दो दिन तक इकाइयों में उत्पादन बंद रहता है और लेबर को खाली बैठा कर भुगतान किया जा रहा है।
एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक संगठन यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मेन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट गुरमीत सिंह कुलार कहते हैं कि पावरकट के चलते इंडस्ट्री में बंदी से एक दिन में करीब 22 करोड़ रुपये का साइकिल एवं पार्ट्स का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। दो दिन पहले ही कर्नाटक सरकार ने सात लाख साइकिलों का आर्डर दिया है। इसके अलावा भी कुछ दूसरे राज्यों के सरकारी आर्डर आ रहे हैं। सरकारी आर्डरों का भुगतान निर्धारित वक्त पर करना आवश्यक है। अब पावरकट के चलते हो रहे प्रोडक्शन लॉस के बीच सरकार के लिए तय समय सीमा में साइकिलें तैयार करना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। जाहिर है इंडस्ट्री घरेलू सप्लाई को धीमा करके इसे मैनेज करने का प्रयास कर रही है। पावरकट से स्टील समेत कई कच्चे माल महंगे हो गए हैं। जबकि इंडस्ट्री से निकल रहा स्क्रैप डेढ़ रुपये प्रति किलो सस्ता हो गया है। ऐसे में इंडस्ट्री पर दोहरी मार पड़ रही है।
कुलार ने कहा कि एक तरफ सरकार राज्य में नए निवेश के लिए हाथ पांव मार रही है, दूसरी तरफ पावरकट लगाकर मौजूदा इंडस्ट्री का दम निकाल रही है। इस दोहरी नीति पर चलते हुए राज्य में औद्योगीकरण का सपना पूरा नहीं किया जा सकता। कुलार ने साफ किया कि यदि सरकार ने पावर कट को वापस न लिया तो आंदोलन किया जाएगा।

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