छाती के कैंसर पर गडवासू में होगा रिसर्च

Ludhiana Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक डा. बीवी सुनील कुमार को छाती के कैंसर की गांठों के विकास और उनक ी शीघ्र जांच पर शोध के लिए प्रोजेक्ट मिला है। केंद्रीय बायो टेक्नोलॉजी विभाग ने युवा खोजकर्ता 2011-12 स्कीम के तहत इस प्रोजेक्ट को जारी किया है। कैंसर की खोज के लिए कुत्तों पर प्रयोग किए जाएंगे। कुत्ते की छाती की गांठों या फोड़ों की तुलना मानव छाती से की जाती है। इसलिए कुत्ता इस खोज में सबसे बेहतर जानवर माना गया है।
प्रोजेक्ट के बारे में डा. सुनील ने कहा कि छाती का कैंसर भारत जैसे विकासशील देशों में तेजी से बढ़ रहा है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2015 तक इससे प्रभावित मरीजों की संख्या दोगुना हो जाएगी। ज्यों ज्यों औरतें घरों से बाहर आ रही हैं, त्यों त्यों उनकी सेहत को लेकर खतरे भी बढ़ रहे हैं। देरी से बच्चे पैदा करना, कम बच्चे पैदा करना, बच्चों को कुछ वक्त के लिए दूध पिलाना आदि इसके प्रमुख कारण हैं। भारत में इस वक्त 115,000 छाती के कैंसर के नए केस हैं। हर दो साल बाद छाती का एक्सरे करके कैंसर की जांच करने की तकनीक का चलन पश्चिमी देशों में काफी है। डा. सुनील को मिला यह प्रोजेक्ट जांच को नई दिशा प्रदान करेगा। डा. सुनील क ो अब तक 16 खोज प्रोजेक्ट मिल चुके हैं।

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