शहरी वोट बैंक पर अकालियों की सेंधमारी!

Ludhiana Updated Tue, 12 Jun 2012 12:00 PM IST
लुधियाना। शहरियों की पार्टी कहलाने वाली भाजपा का आधार शहरों से ही खिसक रहा है। खासकर लुधियाना में भाजपा की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं मानी जा रही है। विधानसभा चुनावों में सूपड़ा साफ करवाने के बाद अब निगम चुनावों में भी पिछली बार के मुकाबले पार्टी की एक सीट कम हो गई है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा के राजनीतिक सहयोगी शिअद का फोकस अब शहरों पर है। गांवों में अपना सिक्का जमाने के बाद अब शिअद ने शहरी इलाकों में भी अच्छी पकड़ बना ली है। नतीजतन शहर में शिअद की तीन सीटें बढ़ गईं। निगम के ताजा नतीजों का आंकलन करने के बाद अब भाजपा को अपना किला बचाने के लिए नए सिरे से मंथन करना होगा। इसके लिए पार्टी के थिंक टैंक ने कसरत भी शुरू कर दी है।
पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी का लुधियाना में सुपड़ा साफ हो गया और भाजपा शहर की तीनों सीटें गंवा बैठी। इसके बाद शहर के जिला प्रधान पर गाज गिरी और जिम्मेदारी परवीन बांसल को सौंपी गई। बांसल ने निगम चुनावों में तमाम राजनीतिक दांव पेंच चल दिए, लेकिन भीतरघात और कमजोर रणनीति के चलते पार्टी अपनी पुरानी परफार्मेंस नहीं दोहरा सकी। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि गलत टिकट वितरण, बागियों की मार के चलते ही पार्टी को नुकसान हुआ है। इन निगम चुनावों में भाजपा को पिछली बार के 13 के मुकाबले केवल 12 सीटें ही हाथ आईं।
उधर, शिअद ने विस चुनावों के बाद रूठे बैंस बंधुओं की वापसी करा शहर में अपने गढ़ को मजबूत किया। इसके बाद शिअद (दिल्ली) के यूथ विंग और व्यापार विंग की टीम को अपने साथ जोड़ा। रमेश जोशी जैसे नाराज कांग्रेसियों को अपने पाले में लेकर शहरी इलाके में अपनी स्थिति में लगातार सुधार किया। हालांकि शिअद की जिला इकाई में भी गुटबाजी, भीतरघात की कमी नहीं है, बावजूद इसके शहर में शिअद की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।

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