दो साल से काटी जा रही थीं जिंदा गाय

Ludhiana Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
मानसा। कस्बा जोगा में चल रहे बूचड़खाने में जीवित गायों को काटने का सिलसिला दो वर्षों से जारी था लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। वहां से बदबू आने के कारण गांव के लोग और जमीन के मालिक वहां पर कम ही जाते थे।
यहां जीवित गायों से भरे कैंटर लाए जाते थे और उन्हें काटकर चमड़ी और हड्डियां अलग कर दी जाती। किसी ने नहीं सोचा था कि गांव की जमीन इस प्रकार का काम हो रहा है। भेद खुला तो कोई भी अपने गुस्से को रोक नहीं पाया। फैक्टरी के अंदर सैकड़ों पशुओं के कटे हुए शव पड़े थे। इनमें पचास वे गाय भी थी, जिन्हें शनिवार रात और रविवार सुबह काटा गया। फैक्टरी के एक कोने में गायों की चमड़ी और दूसरे कोने में हड्डियों का ढेर लगा था। सिंग, पैर और धड़ तो जगह-जगह बिखरे पड़े थे।
ग्रामीणों को फैक्टरी वालों की इस करतूत का पता न चले इसके लिए फैक्टरी में ही जगह-जगह पशुओं के पिंजर दफन कर दिए जाते थे। हालांकि लोगों द्वारा फैक्टरी गिराने के बाद जिला प्रशासन ने फैक्टरी पर जेसीबी चला दी, लेकिन पिंजर इतने ज्यादा थे कि दूर से ही दिखाई देते थे। वहीं, जिला प्रशासन द्वारा मृत पशुओं के शवों को फैक्टरी की जमीन में ही दफन कर दिया गया, लेकिन गांव वालों के गुस्से को शांत नहीं कर सके।
गांव वालों के मुताबिक अकसर फैक्टरी से बदबू आती थी। फैक्टरी के समीप जमीन रखने वाले सुखदेव सिंह व सुखबीर सिंह का कहना है कि बदबू के कारण वह अपनी सात एकड़ जमीन बेच चुके हैं। आजकल अजैब सिंह, नरेंद्र सिंह व भूषण सिंह वासी जोगा ने नाभा निवासी हंस सिंह को ये फैक्टरी ठेके पर दी हुई थी। अजैब सिंह बिजली विभाग में नौकरी करता है। गांव वासियों का आरोप है कि ठेकेदार व उक्त व्यक्ति हरियाणा, राजस्थान से आवारा पशु पकड़ कर बूचड़खाना चलाते थे।

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