दिनरात हॉकी लेकर दौड़ता रहा गुरविंदर चंदी

Jalandhar Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
जालंधर। पंजाब के हॉकी के सितारे गुरविंदर चंदी का हॉकी इंडिया लीग में चयन से उनके घर में जश्न का माहौल है। बुजुर्ग दादी महिंदर कौर की आंखों में खुशी की चमक और मां जसविंदर कौर के पैर जमीन पर नहीं लग रहे हैं। हॉकी इंडिया लीग में खेलने के लिए गुरविंदर चंदी को 50 हजार डॉलर (करीब साढ़े 27 लाख रुपये) मिलेंगे।
मां जसविंदर कौर बेटे गुरविंदर की तारीफों के पुल बांध कर थक नहीं रही थी। गरीब परिवार से निकले गुरविंदर सिंह ने हॉकी स्टिक से जहां परिवार की आर्थिक हालत को सुधार दिया वहीं देश में नाम भी रोशन कर दिया। मां जसविंदर और दादी मोहिंदर कौर खुशी के मारे उसकी बचपन की बातों को ताजा करने लगती हैं। कहती हैं कि उसको बस दो ही काम होते थे, एक हॉकी पकड़ना और दूसरा पढ़ाई करना। छठी क्लास में पढ़ता था, जब से हॉकी लेकर दौड़ता था। गरीबी की हालत में भी गुरविंदर ने संघर्ष जारी रखा।
दोआबा खालसा स्कूल में पढ़ता था गुरविंदर चंदी। चाचा दलजीत सिंह हॉकी के अच्छे खिलाड़ी थे। छठी क्लास से ही उनकी हॉकी को लेकर भागने लगा था। स्कूल से आठवीं कक्षा पास करने के बाद तो निश्चय कर लिया कि अब हॉकी में ही अपना नाम चमकाएगा। स्कूल छोड़कर सुरजीत हॉकी अकादमी में दाखिला ले लिया। मां जसविंदर कौर बताती हैं कि चार साल तक सिर्फ मैदान में ही दिन रात गुजरे। अकादमी में हॉकी के साथ जमा दो तक की कक्षा भी पास की और बाद में डीएवी कालेज दाखिला ले लिया।
हीरे की पहचान जौहरी को होती है, यह बात कहते हुए भाई हरप्रीत सिंह ने बताया कि उसको वहीं से पंजाब एंड सिंध बैंक ने अपने पास ले लिया। बैंक में क्लर्क की नौकरी दी और साथ ही अपनी टीम में शामिल कर लिया। पंजाब एंड सिंध बैंक की टीम का नाम गुरविंदर ने खूब चमकाया लेकिन बैंक में उसको अधिकारी नहीं बनाया जा सकता था। बाद में ऑयल एंड नेचुरल गैस (ओएनजीसी) में उन्हें एक अधिकारी के रूप में नौकरी पर रख लिया। उसी दिन से गुरविंदर दिल्ली चला गया और वहां हॉकी की प्रेक्टिस करने लगा। भारतीय ओलंपिक टीम में शामिल होकर गुरविंदर सिंह चंदी ने ओएनजीसी का नाम भी चमकाया। घर के हालात काफी सुधरने शुरू हो गए और अब उनका इंडियन हॉकी लीग के लिए चयन हुआ है, जिसके उन्हें 50 हजार डॉलर मिलेंगे। मां जसविंदर कौर कहती हैं कि अभी उसकी उम्र 23 साल है और वह वाहेगुरु का शुक्र करती है, जिसने उस पर मेहर रखी हुई है। गुरविंदर सिंह टूर्नामेंट खेलने के लिए दुबई चला गया है लेकिन जाने से पहले सोमवार सुबह उसने 50 हजार डॉलर की खुशखबरी फोन पर परिवार को दी।

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