यूके में पंजाबी विद्यार्थियों के वीजा पर रोक!

Jalandhar Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
जालंधर। यूके ने पंजाबी विद्यार्थियों के स्टडी वीजा पर अघोषित तरीके से प्रतिबंध लगा दिया है। पिछले दो महीने के दौरान जालंधर और चंडीगढ़ से 11 हजार विद्यार्थियों ने स्टडी वीजा के लिए आवेदन किया लेकिन एक भी विद्यार्थी को वीजा नहीं दिया गया है, जबकि दिल्ली और दक्षिणी राज्यों के 75 फीसदी आवेदन स्वीकार कर लिए गए।
पंजाबियों पर यह प्रतिबंध 1 अक्तूबर से नियमों में हुए बदलाव के बाद लगाया गया है। नए नियम के तहत वीजा अधिकारी को वीजा आवेदनकर्ता का इंटरव्यू लेकर आवेदन रिजेक्ट करने का अधिकार दिया गया। कई पंजाबी विद्यार्थियों ने दिल्ली जाकर भी आवेदन किया लेकिन वहां भी उनका वीजा आवेदन ठुकरा दिया गया।
वीजा के लिए जालंधर व चंडीगढ़ में बने यूके वीजा कार्यालयों में सितंबर के बाद पंजाब मूल के करीब 11 हजार विद्यार्थियों ने आवेदन किया लेकिन एक भी विद्यार्थी को वीजा नहीं दिया गया। यूके वीजा अधिकारी ने 75 फीसदी वीजा यह दलील देकर रिजेक्ट किए कि उनको तसल्ली नहीं है कि आवेदनकर्ता पढ़ने के लिए जा रहा है। बाकी 25 फीसदी आवेदनों पर धारा 320-ए का इस्तेमाल करते हुए यूके के लिए 10 साल तक वीजा आवेदन करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन आवेदनों पर टिप्पणी की गई है कि आपके परिवार के पास पर्याप्त इनकम नहीं है, इसलिए वीजा रिजेक्ट किया जाता है। जबकि वीजा आवेदन के फार्म में इनकम का कॉलम ही नहीं है।

विद्यार्थियों की फंस गई फीस
यूके वीजा के लिए अकाउंट में नौ हजार पौंड (करीब आठ लाख रुपये) होने जरूरी हैं जो वहां के कालेज या यूनिवर्सिटी की फीस पर खर्च होते हैं। इसी के आधार पर 1 अक्तूबर से पहले वीजा जारी किए जाते थे। आवेदन करने वाले 80 फीसदी स्टूडेंट को वीजा मिल जाता था। वीजा अधिकारी को इंटरव्यू के बाद मनाही का अधिकार मिलने से इनकम का बहाना बनाकर पंजाबी मूल के विद्यार्थियों का वीजा नहीं दिया जा रहा है। पिछले दो माह के दौरान यूके की यूनिवर्सिटी व कालेजों को भेजी गई विद्यार्थियों की फीस फंस गई है। वीजा न मिलने के बाद अब यूनिवर्सिटी व कालेज प्रबंधक फीस वापस भेजने में आनाकानी कर रहे हैं।

अच्छी पढ़ाई का सपना मरा
यूके में लीगल यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट लंदन, ग्लैंडर यूनिवर्सिटी, लीड्स मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी, हार्ट फोर्ट शायर एचआईबीटी यूनिवर्सिटी प्रमुख हैं। इसके अलावा करीब डेढ़ हजार कालेज भी हैं। यहां फीस भेजकर दाखिला लेने वाले मास्टर डिग्री कोर्स के स्टूडेंट को भी वीजा देने से मना कर दिया गया है। ये विद्यार्थी एमबीए व एमएससी में दाखिला लेने के लिए बाकायदा 10 लाख रुपये सालाना के हिसाब से फीस अदा कर चुके थे।

इनकम का कोई नियम ही नहीं
यूके स्टूडेंट वीजा की नामी कंपनी एक्सप्रेस स्टूडेंट्स सर्विस के गुरिंदर भट्टी व त्रिवेदी ओवरसीज के सुकांत ने बताया कि पिछले दो माह से एक भी पंजाबी को वीजा नहीं दिया गया है। काफी आवेदन उनकी कंपनियों के माध्यम से किए गए थे। यहां तक कि उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले पंजाबी मूल के विद्यार्थियों के वीजा आवेदन भी ठुकरा दिए गए। वहां भी इनकम की कमी को कारण बताया गया है, जबकि ऐसा कोई नियम यूके दूतावास या यूके बार्डर एजेंसी का नहीं है। 20 फीसदी विद्यार्थी ऐसे हैं जो यूके जाकर सिर्फ उच्च शिक्षा लेकर वापस पंजाब लौट आते हैं। उनका मकसद वहां बसना या जॉब करना नहीं होता। ऐसे स्टूडेंट को भी निराशा हाथ लगी है।

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