हर सांस में थे पंजाबी महक

Jalandhar Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
इंद्र कुमार गुजराल यानी एक ऐसा शख्स जिसने जुबान से जो अल्फाज निकाला, उसे पूरा कर दिखाया। जो कहा उसे बिनी किसी से सलाह मशविरा किए तत्काल कर दिखाया। ऐसा शख्स मैंने कभी नहीं देखा, जो पंजाब के प्रति इतना समर्पित रहा हो। गुजराल के साथ काफी समय रहने का वक्त मिला। मुझे वह सब कुछ मिला, जिसकी मैं कल्पना नहीं कर सकता। गुजराल के हर शब्द में जान होती थी। मुझे याद है एक बार उन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को फोन किया और साफ शब्दों में कहा कि हम कश्मीर दे नहीं सकते हैं, तुम हमसे ले नहीं सकते हो, जब यह संभव नहीं है तो झगड़ा किस बात का। आ जाओ बैठकर दोनों देशों की गरीबी, अनपढ़ता व बेरोजगारी पर ध्यान दिया जाए। क्या प्रधानमंत्री रहते हुए कोई पड़ोसी देश के पीएम को सीधा ऐसा कह सकता है? कदापि नहीं, पर गुजराल साहब में ताकत थी जो उनके शब्दों में दिखती थी।
अब साइंस सिटी की बात लें। वहां हवाई अड्डा बनना था। 400 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हो चुका था और 400 एकड़ का और अधिग्रहण किया जाना था। पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल किसानों को लेकर उनके पास पहुंच गए और कहा कि गुजराल साहब यह जमीन काफी उपजाऊ है। 400 एकड़ ले चुके हैं। और 400 एकड़ देने से इस इलाके की खेती पर असर पड़ेगा। गुजराल जी ने आव देखा न ताव, सीधा कहा जाओ- वहां एयरपोर्ट नहीं बनेगा। वहां साइंस सिटी बना देते हैं। उन्होंने जो कहा पूरा कर दिखाया।
मैं पंजाब में उनका इंचार्ज होता था। उनका कार्यक्रम देखता था। मुझे याद है कि एक बार मैंने उनसे कहा कि आपको बस्ती दानिशमंदा स्थित रविदास जी महाराज के गुरुद्वारा साहिब में जाना है। रास्ता काफी तंग व खराब था। आईबी व अन्य एजेंसियों ने तो साफ मना कर दिया, पर मैं वादा कर चुका था। मैंने गुजराल साहब से दोबारा जाने को नहीं कहा लेकिन वे सारे काफि ले को वहां ले गए और बाकायदा पैसा देकर आए। वे नेक इंसान थे। हमेशा जब भी मिलना होता तो पंजाब की बात करते। पंजाब में किस चीज की कमी है, कैसे दूर होगी। वे राष्ट्र की जिम्मेदारी तो निभाते थे लेकिन पंजाब के प्रति समर्पित थे। एक बार नकोदर रोड पर उनका कार्यक्रम था। जहां फंक्शन था वहां छप्पड़ था। दो दिन बाद गुजराल को आना था। प्रशासन ने कहा कि छप्पड़ है वे क्या जाएंगे? एक तरह से कार्यक्रम रद कर दिया लेकिन गुजराल साहब को पता चला तो उन्होंने कहा कि वे जाएंगे और दो दिन में उस छप्पड़ को बंद किया गया। वहां खूबसूरत पार्क बना दिया गया। आज लोग उसे याद करते हैं। पड़ोसी देश के बारे में वे काफी जानकारी रखते थे। अकसर जब भी जाना होता तो बार-बार पाकिस्तान के संबंधों को लेकर सवाल उठ जाता था। एक बार तो उन्होंने साफ ही कह डाला कि पड़ोसी नहीं बदल सकते, माहौल बदला जा सकता है।
(लेखक पंजाब के जाने माने साहित्याकर व लेखक हैं और गुजराल के जालंधर में दो बार चुनाव प्रभारी रह चुके हैं।

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