अपने कालेज की खातिर सीएम का सम्मान ठुकराया

Jalandhar Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
जालंधर। यश चोपड़ा अपने दोआबा कालेज के बड़े दीवाने थे। एक बार उन्होंने कालेज के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से सम्मान लेने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि वह आज कालेज की चहारदीवारी में हैं, उनके प्रिंसिपल उनको जहां जाने के लिए कहेेंगे, वह वहीं जाएंगे। घटना 2004 की है। यश को दोआबा कालेज में दीक्षांत समारोह में बुलाया गया था।
कालेज के अंदर ही उनको तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फोन किया कि प्रदेश सरकार आपको सम्मानित करना चाहती है, इसके लिए कुछ समय दिया जाए। यश चोपड़ा अड़ गए कि वह तो आज कालेज मेें हैं और प्रिंसिपल साहब जो हुक्म करेंगे, वह उसकी पालना करेंगे। आखिरकार प्रिंसिपल ने उनको पांच बजे के बाद जाने के लिए मना लिया था।
दोआबा कालेज का आंगन आज सूना है, यहां से निकलकर दुनिया भर में शोहरत हासिल करने वाला यश चोपड़ा इस दुनिया को अलविदा कह चुका है। उनका क्लासरूम दोआबा कालेज में भूगोल विभाग से सटा हुआ है। क्लासरूम वैसा ही है, जैसा पहले था, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां पर पढ़ने वाले विद्यार्थी आज अपने पुराने छात्र को याद कर चर्चा कर रहे हैं।
मुंबई की चकाचौंध दुुनिया में जाकर यश चोपड़ा अपने क्लासरूम के दीवाने थे। कालेज के पूर्व प्रिंसिपल डा. आरपी भारद्वाज कहते हैं कि वह जितनी भी अपने कालेज में आए, उनके कदम क्लासरूम की तरफ बढ़ गए। क्लासरूम में घुसते ही बीच वाली लाइन के दूसरे नंबर के बैंच पर बैठ जाते, फिर आंखें बंद कर अतीत में चले जाते।
जब पिछली बार यश चोपड़ा कालेज में आए तो कुछ देर तक अपने क्लासरूम में बैठने के बाद उठ गए और कहने लगे कि कालेज व इस क्लास का उनकी जीवनी में बहुत महत्व है। इस क्लास में आज भी विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। यश चोपड़ा की अपने गुरु के प्रति कितनी श्रद्धा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछली विजिट में उन्होंने कालेज प्रबंधकों से कहा था कि अगर प्रोफेसर विबरा उनकी लाइफ में न आए होते तो शायद ही वह कोई मुकाम हासिल कर पाते। पिछली बार जब कालेज में चोपड़ा आए तो अपने गुरु प्रोफेसर विबरा से मिलने की इच्छा जताई। तत्कालीन प्रिंसिपल आरपी भारद्वाज ने कहा कि वह प्रोफेसर विबरा को बुलवा लेते हैं लेकिन यश चोपड़ा ने कहा नहीं, मैं खुद उनके घर तक जाऊंगा। वह प्रिंसिपल को साथ लेकर प्रो. डीडी विबरा के घर की तरफ चल पड़े थे। यश चोपड़ा के इस अंदाज की मिसाल आज भी दोआबा कालेज में विद्यार्थियों को दी जाती है।

दोआबा कालेज में शोकसभा
जालंधर। दोआबा कालेज के पूर्व छात्र एवं फिल्म निर्माता, निर्देशक यश चोपड़ा के निधन पर सोमवार को कालेज के ओपन एयर थिएटर में एक शोकसभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर कालेज के सभी शिक्षकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने यश चोपड़ा को श्रद्धांजलि दी। प्रिंसिपल डा. नरेश कुमार धीमान ने कहा कि यश चोपड़ा दोआबा कालेज के ऐसे उज्ज्वल नक्षत्र थे जिनकी आभा ने पूरे देश को प्रकाशमान किया। इस कालेज के विकास में यश चोपड़ा का बहुमूल्य योगदान रहा। चोपड़ा हर साल कालेज के विकास के लिए एक लाख रुपये का अनुदान भेजते रहे। कालेज द्वारा उन्हें 2003-04 में दोआबा आवार्ड से सम्मानित किया गया। कालेज प्रबंधकीय समिति के प्रधान चंद्र मोहन ने कालेज के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में श्री यश चोपड़ा जी के निर्देशन में निर्मित मल्टी मीडिया स्टूडियो का नाम श्री यश चोपड़ा मल्टीमीडिया स्टूडियो रखने की घोषणा की।

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