अध्यापक ही खोलते हैं स्कूल का गेट

Jalandhar Updated Wed, 29 Aug 2012 12:00 PM IST
जालंधर। सूबे में राइट टू एजूकेशन को लागू करने का शिक्षा विभाग का दावा महज एक ख्वाब दिख रहा है। शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका रोजाना नई-नई योजनाओं को लागू करने की घोषणा करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ये खोखली साबित हो रही हैं। शिक्षा मंत्री ने स्कूलों के अध्यापकों को सिर्फ शिक्षा प्रसार का काम सौंपा है, लेकिन जालंधर के सरकारी हाई स्कूल में अध्यापक पढ़ाने के साथ-साथ स्कूल का गेट खोलने व बंद करने, सुरक्षा करने और डाक को जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंचाने तक का काम कर रहे हैं।
सरकारी हाई स्कूल ताजपुर, भगवानपुर, नाहल, दोलीके और सिंदड़ सहित कई अन्य स्कूलों में एक भी सेवक नहीं है। इस वजह से अध्यापक खुद आकर स्कूल का गेट खोलने से लेकर साफ सफाई और शाम को स्कूल बंद करके जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय तक डाक पहुंचा रहे हैं। ऐसे में उनके सिर पर सिलेबस खत्म कराने और स्कूली समय में दूसरे काम न करने के चेतावनी भरे आदेशों की टेंशन रहती है, क्योंकि शिक्षा विभाग ने अध्यापकों को सिलेबस पूरा कराने व स्कूली समय में स्कूल से गायब रहने पर सख्त कार्रवाई के आदेश दे रखे हैं।
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जालंधर में दर्जा चार कर्मचारियों के कुल 1063 पद हैं। इनमें 507 पद खाली हैं यानी जालंधर में 50 फीसदी पद दर्जा चार कर्मचारियों के खाली पड़े हैं। पूरे राज्य में यह आंकड़ा 70 फीसदी तक पहुंच गया है।

खाली पद भरने की योजना कर रहे तैयार : शिक्षा मंत्री
राज्य के डायरेक्टर जनरल स्कूल एजूकेशन केएस पन्नू ने कहा कि शिक्षा विभाग में दर्जा चार कर्मचारियों के काफी पद खाली हैं। इसके कारण अध्यापकों को स्कूल के दूसरे काम करने की जानकारी उन्हें है। वे यह मुद्दा शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका के समक्ष उठाएंगे।
शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका का कहना है कि दर्जा चार के कर्मचारियों के खाली पदों को भरने के लिए योजना तैयार की जा रही है। जल्द ही कर्मचारियों के पदों को भर दिया जाएगा।

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