पावर ऑफ अटार्नी पर सख्ती ने बिगाड़ा खेल

Jalandhar Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
जालंधर। जालंधर व अमृतसर में पॉवर ऑफ अटार्नी पर सख्ती से एनआरआई का पसीना छूट रहा है। एनआरआईज विदेशों से बैठकर पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिए जमीनों की खरीद-फरोख्त करते रहते हैं, लेकिन सख्त नियमों ने उनके खेल को बिगाड़ दिया है।
जालंधर व आसपास का इलाका एनआरआई का मुख्य क्षेत्र है और यहां के लाखों लोग विदेशों में बसे हुए हैं। लेकिन वे पंजाब में जमीनों की खरीद पर काफी राशि निवेश करते हैं। उनके कारण ही दोआबा का प्रापर्टी बाजार काफी ऊंचाई पर रहता है। विदेशों में बैठकर जमीन की रजिस्ट्री क रवाना काफी मुश्किल है और दूसरा जमीन को बेचने के लिए एनआरआई बार-बार भारत नहीं आ सकते, इसलिए वह मुख्तारनामे का इस्तेमाल करते हैं।

रोजाना 20-25 पावर आफ अटार्नी आती हैं एनआरआई की
कानून के मुताबिक कोई एनआरआई अगर विदेश में बैठकर जमीन की पॉवर आफ अटार्नी भेजता है तो उसको उसकी एक कापी डिवीजनल कमिश्नर कार्यालय में भेजता है ताकि वहां रजिस्टर होने के बाद उसे कानूनी मान्यता मिल सके। जालंधर कमिश्नर कार्यालय में रोजाना 20 से लेकर 25 पावर आफ अटार्नी रजिस्टर्ड होने के लिए पहुंचती है।

यह है नया नियम
नए नियम के मुताबिक पावर आफ अटार्नी धारक जमीन को बेच तो सकता है लेकिन उससे प्राप्त होने वाली रकम एनआरआई के खाते में जमा करवाएगा, जिससे उसने मुख्तारनामा लिया है।

सरकार को मिलेगा राजस्व
दरअसल पावर आफ अटार्नी के जरिए जिन जमीनों की खरीद-बेच की जाती है, उसके लिए सरकार को दो हजार की फीस ही अदा करनी पड़ती है। सरकार का तर्क है कि पावर आफ अटार्नी धारक जमीन बेच तो सकता है लेकिन पैसा अपने पास नहीं रख सकता। पावर आफ अटार्र्नी के जरिए काला धन पूरी तरह से एडजस्ट हो जाता है, क्योंकि राजस्व विभाग अटार्नी के बारे में आयकर विभाग को सूचित नहीं करता। आयकर विभाग को सिर्फ जमीन की रजिस्ट्री की कापी जाती है। रजिस्ट्री पर जमीन की कीमत का 10 फीसदी राजस्व सरकार को स्टांप ड्यूटी के रूप में देना होता है। अगर एक लाख की रजिस्ट्री करवाई जाएगी तो 10 हजार अदा करने होंगे।

भाजपा के लिए चुनौती
अटार्नी पर सख्ती का मामला अब भाजपा के पाले में है। भाजपा का शहरी क्षेत्रों में खासा जनाधार है और इस मामले में शहरी क्षेत्रों में काफी समस्या खड़ी हो गई है। भाजपा नेता इस बारे में रणनीति बना रहे हैं ताकि सरकार पर प्रेशर बनाकर इसका हल निकाला जा सके।

एनआरआई को छूट मिलनी चाहिए
जालंधर। एनआरआई सभा के पूर्व प्रधान प्रीतम सिंह नारंगपुर का कहना है कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों को पावर ऑफ अटार्नी के मामले में छूट मिलनी चाहिए। इस फैसले से एनआरआई में काफी दहशत और रोष है। विदेश से एनआरआई एक जमीन का सौदा करने के लिए भारत नहीं आ सकता, उसको किसी न किसी के कंधे की जरूरत होती है। उसी कंधे को वह अपना अटार्नी बनाता है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह एनआरआई को इस बात की छूट दे कि वह अपनी अटार्नी भारत में किसी को देकर जमीन कोे बिक वा सकते हैं। इस मामले को एनआरआई सरकार के समक्ष जोरदार ढंग से उठाएंगे, इसको लेकर चरचा चल रही है। इस कठोर फैसले से एनआरआई धक्के खाने पर मजबूर हो जाएंगे।

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