काली बेईं बनी गंदे पानी का छप्पड़

Jalandhar Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
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कपूरथला। कपूरथला से करीब तीन किलोमीटर की दूरी से गुजरती बेईं को झील का रूप देकर कांजली पिकनिक सपाट को एक वेटलैंड पर्यटन-स्थल के रूप में उभारने की किताबी योजनाएं और जुबानी जमा-खर्च कई बार हुए, लेकिन आज जमीनी हकीकत यही है कि कांजली वेटलैंड एक बदबूदार झील और छप्पड़ के सिवा कुछ नहीं है।
पर्यावरणविद संत बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल ने पवित्र काली बेईं की कारसेवा के दौरान इसके पूरे मार्ग में विभिन्न स्थानों पर सुंदर घाटों का निर्माण किया था। तब आसपास के क्षेत्रों के लोग बैसाखी, ग्रहण तथा अन्य धार्मिक महत्त्व के दिनों पर स्वच्छ एवं पवित्र जल में डुबकी लगाने इन घाटों पर आना शुरू हो गए थे। अब यह बेईं इस योग्य केवल सुल्तानपुर लोधी नगर में ही है।
उस समय कांजली ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया था, लेकिन आज इसमें काई, बूटी और गार की वजह से यहां पर पानी बदबू मारता है। किसी समय कांजली वेटलैंड प्रवासी पक्षियों की शरण-स्थली हुआ करता था। समय समय पर अनेकों प्रजातियों के प्रवासी पक्षी इस वेटलैंड में शरण लेते थे, लेकिन अब हालत यह है कि यदि कोई स्थानीय पक्षी भी भूले भटके बेईं में उतरने कि भूल कर बैठे तो सिवाए गंदगी के उसे कुछ हासिल नहीं होता।

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