डीटीओ क्लर्क पर घोटाले का आरोप

Jalandhar Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
जालंधर। डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट कार्यालय जालंधर में तैनात रह चुकी कर्मचारी कांता ने सरकार को लाखों का चूना लगा दिया है। कांता कैश काउंटर पर तैनात थी। वह लोगों से सरकारी फीस वसूलकर बैंक में जमा न करवा कर जेब में डालती रही। जालंधर के डीटीओ की शिकायत पर स्थानीय कमिश्नरेट पुलिस के बारादरी थाने ने कांता के खिलाफ धारा 409 (सरकारी पैसे के गबन) का केस दर्ज कर लिया है। कांता इन दिनों गुरदासपुर डीटीओ कार्यालय में तैनात है। जांच अधिकारी विजय कंवर पाल का कहना है कि पुलिस कांता को जल्द ही गिरफ्तार कर लेगी, जिसके बाद पता चल पाएगा कि कितना पैसा गबन किया है। ऐसी आशंका है कि राशि करीब 15 लाख है।
जालंधर के डीटीओ आरएल जस्सल ने पुलिस को शिकायत भेजी थी कि कार्यालय में कैश काउंटर पर मैडम कांता तैनात थी। वह लोगों से सरकारी फीस लेती रही लेकिन वह पैसा बैंक में जमा नहीं हुआ। लोगों को रसीदें मैनुअल दी गई थीं, इसलिए इसका कोई ऑनलाइन रिकार्ड नहीं था। उन्होंने कांता को सारा रिकार्ड जमा करवाने को कहा था ताकि सारे सबूतों को लेकर उस पर केस दर्ज करवाया जा सके, लेकिन कांता का तबादला गुरदासपुर हो गया। वह सारा रिकार्ड लेकर गुरदासपुर चली गई और उसने बार-बार कहने पर भी सरकारी रिकार्ड जालंधर कार्यालय में जमा नहीं करवाया।
पुलिस ने डीटीओ आरएल जस्सल की शिकायत मिलते ही गबन का केस दर्ज कर लिया है। डीटीओ जस्सल का कहना है कि उन्होंने 10-12 खत सरकारी तौर पर कांता को लिखे थे। उसका जवाब नहीं आया तो मामला स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को बताया गया, जिन्होंने केस दर्ज कराने की अनुमति दे दी।
वहीं डीटीओ कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक सारा खेल प्राइवेट कारिंदों के माध्यम से खेला गया है। कांता कैश काउंटर पर बैठती थी, लेकिन उसने आगे काम के लिए दो निजी युवकों को रखा हुआ था। उन युवकों के कंधों पर ही जिम्मेदारी होती थी कि सारा सरकारी पैसा बैंक में जमा करवाकर उसकी रसीद ली जाए।

सस्पेंड, बहाल और गबन का खेल
कांता के गबन के बारे में जालंधर के डीटीओ आरएल जस्सल को भनक लग गई थी इसलिए उन्होंने सारा मामला एसटीसी हरजीत सिंह को बता दिया था। एसटीसी ने कांता को 14 मई को सस्पेंड कर दिया था। फिर न जाने ऐसा क्या हुआ कि एसटीसी हरजीत सिंह ने कांता को बहाल कर उसका तबादला गुरदासपुर कर दिया। जालंधर के डीटीओ कार्यालय के अधिकारी परेशान हो गए और डीटीओ ने कांता के गबन के बारे में एसटीसी को दोबारा पत्र लिखा कि वह न तो रिकार्ड जमा करवा रही है और न ही पैसा। एसीटीसी हरजीत सिंह ने कांता के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करवाने की अनुमति दे दी। सवाल यह है कि कांता को सस्पेंड कर बहाल कैसे किया गया? क्या अधिकारियों पर कोई खास दबाव था। इस पर डीटीओ आरएल जस्सल का कहना है कि उनको इसकी जानकारी नहीं है कि कांता बहाल कैसे हुई? वह इसके बारे में कोई अधिकारिक ब्यान नहीं दे सकते।

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