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करोड़ों की जमीन लाखों में दी

Jalandhar Updated Sun, 29 Jul 2012 12:00 PM IST
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जालंधर। आखिरकार नगर निगम मेयर राकेश राठौर को फिश एक्वेरियम लगाने की इतनी जल्दबाजी क्यों है? यह सवाल बार-बार कांग्रेसी पार्षद पूछ रहे हैं और मेयर तेजी से एक्वेरियम लगाने के लिए प्रयासरत हैं। उस स्थान को भी खाली करवा लिया गया है, जहां यह प्रोजेक्ट लगाया जाना है। कांग्रेस के पूर्व पार्षद और महिला पार्षद उमा बेरी के पति राजिंदर बेरी ने कई सवाल उठाए हैं, जिनको लेकर निगम अधिकारी फिश एक्वेरियम के चक्रव्यूह में फंस गए हैं।
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1- हाउस सुप्रीम होता है, अगर फिश एक्वेरियम लगाया जाना था तो हाउस में प्रस्ताव क्यों नहीं पास हुआ?
2- पार्षदों की राय क्यों नहीं ली गई? इतनी जल्दबाजी में मेयर ने एमओयू हस्ताक्षर क्यों कर दिए?
3- जिस स्थान पर एक्वेरियम लगाया जाना है, उसकी मार्केट कीमत 25 लाख रुपये प्रति मरला है। निगम ने 200 मरला जमीन कंपनी को 45 साल के लिए दे डाली और इसकी एवज में सिर्फ 11 लाख रुपये प्रति साल एग्रीमेंट कर लिया। क्या किसी वित्तीय विशेषज्ञ को इसके बारे में पूछा गया?
4- बेरी के मुताबिक फिश एक्वेरियम स्थल पर अगर कंपनी दुकानें बनाकर 45 साल के लीज पर देती है तो कंपनी ही करोड़ों का मुनाफा कमाएगी।
5- हाउस में कंपनी बाग के आधुुनिकीकरण का प्रस्ताव पास हुआ था। इस पर चार करोड़ की लागत आनी थी, इसी में फूड कोर्ट बनना था। ठेकेदार ने समय पर काम नहीं किया तो उसको ब्लैक लिस्ट कर दिया गया? फिर उसी फूड कोर्ट को दोबारा मंजूरी किसने दी? कैसे 30 करोड़ का फिश एक्वेरियम प्रोजेक्ट फूड कोर्ट का हिस्सा बना दिया गया?
6- कं पनी बाग के प्रोजेक्ट में फूड कोर्ट 20 साल की लीज पर था। इसमें फिश एक्वेरियम कैसे डालकर इसको 45 साल के लिए कर दिया गया?
7- अगर मेयर को इतना अच्छा प्रोजेक्ट बनाना है तो वे 120 फीट रोड पर पड़ी जमीन के लिए एमओयू साइन करते। शहर का दिल माने जाने वाली बेशुमार कीमती जमीन को क्यों दे दिया गया?

यह हुआ खेल
मनोरंजन कालिया जब निकाय मंत्री थे तो कंपनी बाग के सौंदर्य के लिए चार करोड़ की राशि मंजूर की गई थी। इसके तहत फूड कोर्ट बनाने का प्रोजेक्ट भी था और तमाम कंपनियों से टेंडर लिए गए थे। कंपनी बाग में 20 साल के लिए फूड कोर्ट बनाया जाना था। कंपनी बाग का ठेका रद हो गया, फूड कोर्ट का प्रोजेक्ट उसी का हिस्सा था वह भी साथ में खत्म हो गया। अब अचानक शहर के बीचो-बीच करोड़ों रुपये की निगम जमीन पर थाइलैंड की कंपनी द्वारा थ्री-डी फिश एक्वेरियम लगाने के प्रोजेक्ट का एमओयू मेयर ने साइन कर दिया। इससे कांग्रेसी समेत सत्ताधारी पार्टी के कई पार्षदों को झटका लगा क्योंकि इस प्रोजेक्ट को निगम हाउस में पास ही नहीं किया गया। मेयर का कार्यकाल दो माह में खत्म हो रहा है, लेकिन फिश एक्वेरियम प्रोजेक्ट में अचानक तेजी ला दी गई। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि इसमें भ्रष्टाचार है।

संशोधन कर शामिल किया प्रोजेक्ट : मेयर
मेयर राकेश राठौर के मुताबिक हाउस ने 2010 में फूड कोर्ट को पास किया था। इसमें अच्छा रिस्पांस नहीं मिल रहा था, इसलिए इसमें संशोधन कर इसमें फिश एक्वेरियम प्रोजेक्ट को 45 साल के लिए शामिल कर लिया और बीओटी के तहत इसकोे मंजूरी दे दी गई। हाउस ने तो पहले से ही पास कर रखा था, उसमें कुछ बदलाव किया गया है।

पहले बीओटी प्रोजेक्टों में फेल रहा है निगम
बिल्ट आपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) प्रोजेक्ट कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में शुरू हुए थे। तब योजना बनाई थी कि जो कंपनी शहर में प्रोजेक्ट बनाएगी, उसको कई साल के लिए होर्डिंग्स आदि लगाने की छूट होगी। जालंधर में डीएवी कालेज फ्लाईओवर, ज्योति चौक पार्किंग व आइसक्रीम पार्लर, कंपनी बाग चौक अंडर ग्राउंड पार्किंग, नरिंदर सिनेमा के पास अंडर ग्राउंड पार्किंग, दो फुट ओवर ब्रिज को बीओटी के तहत पास किया गया था। हालांकि इनमें से एक भी बीओटी प्रोजेक्ट सफल नहीं रहा। फुट ओवर ब्रिज तो हटा दिए गए जबकि अंडर ग्राउंड पार्किंग में अभी नियम और शर्तें फाइनल नहीं हो पाई हैं। ज्योति चौक पर आइसक्रीम पार्लर का मामला कोर्ट में विचाराधीन है, यही हाल डीएवी कालेज फ्लाईओवर का है। कांग्रेसी पार्षद व हाउस में विपक्ष के नेता जगदीश राज राजा का कहना है कि सरकार को जब पता है कि बीओटी का तजुर्बा फेल है तो क्यों फिश एक्वेरियम प्रोजेक्ट को 45 साल के लिए बीओटी के तहत कं पनी को दे दिया?

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