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पुलिस ने दिखाया गरीब और अमीर का फर्क!

Jalandhar Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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जालंधर। पंजाब की पुलिस गरीब व अमीरों में कितना फर्क रखती है, इसका अंदाजा जालंधर के छह नंबर थाना क्षेत्र की दो वारदात से हो जाता है। एक वारदात में आरोपी गरीब नौकरानी थी जबकि दूसरे में अमीर महिला। थाना एक ही था लेकिन आरोपी नौकरानी की जानकारी पुलिस ने बाकायदा प्रेस कांफ्रें स करके दी जबकि आरोपी अमीर महिला को कब गिरफ्तार किया गया और कब रिहा कर दिया गया, इसकी भनक आला पुलिस अधिकारियों को भी नहीं लगी।
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दरअसल 10 जुलाई को हाउसिंग बोर्ड कालोनी निवासी संजीव कुमार के यहां से उनकी नौकरानी पूजा सोने के आभूषण चुराकर ले गई थी। इस सोने को पुलिस ने रिकवर कर लिया और बाकायदा एसीपी सर्बजीत सिंह, एसएचओ सुभाष चंद्र ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर वारदात के खुलासे की जानकारी दी। प्रेस कांफ्रेंस में आरोपी नौकरानी को भी पेश किया गया। वहीं कुछ दिन पहले एक शोरूम में घुसकर उसके मालिक योगेश धीर पर रिवाल्वर तानकर हुड़दंग मचाने वाली पंजाबी फिल्मों के नायक करण कुंद्रा की बहन मधु कुंद्रा को गिरफ्तार किया गया और चुपचाप जमानत भी दे दी गई। मधु कुंद्रा के मामले में पुलिस ने कई गैरजमानती धाराओं को तोड़ दिया। इसमें धारा 452 गैरजमानती थी, जिसे 451 जमानती धारा में तबदील कर दिया गया। वहीं पुलिस ने यह तर्क देकर कि पिस्तौल नकली थी, आर्म्स एक्ट की धारा भी नहीं लगाई। मधु कुंद्रा इस मामले में वांछित थी और उसे थाना छह की पुलिस ने कागजात में गिरफ्तार कर जमानत भी दे डाली।

एसीपी ने कहा, मुझे पता ही नहीं
माडल टाउन के एसीपी सर्बजीत सिंह से जब पूछा गया कि गरीब नौकरानी की गिरफ्तारी को तमाशा बनाया गया जबकि पिस्तौल लेकर शोरूम में घुसकर हुड़दंग मचाने वाली मधु कुंद्रा की गिरफ्तारी की भनक भी नहीं लगने दी, इस पर उन्होंने कहा - मुझे खुद नहीं पता। मैं इलाके का एसीपी हूं, मुझे भी थाने के एसएचओ सुभाष चंद्र ने नहीं बताया कि मधु कुंद्रा को गिरफ्तार कर जमानत देकर घर भेज दिया गया है।

गलत धारा लगाने वाले पर कार्रवाई
एसीपी सर्बजीत सिंह ने जांच के बाद मधु कुंद्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर में धारा 452 को बदलकर 451 कर दिया है। 452 की जमानत के लिए अदालत में याचिका दायर करनी पड़ती है जबकि 451 धारा के लिए जमानत थाने से मिल जाती है। एसीपी ने कहा शोरूम पब्लिक प्लेस होता है। वहां तोड़फोड़ में धारा 451 का ही इस्तेमाल होता है। एसीपी से जब पूछा गया कि केस दर्ज करने वाले एसआई मलकीयत सिंह ने पहले धारा 452 लगाकर केस क्यों दर्ज किया, इस पर उन्होंने कहा कि इस एफआईआर में धारा गलत लगाई गई थी, जिसके लिए सब इंस्पेक्टर मलकीयत सिंह पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश कमिश्नर गौैरव यादव से की गई है।

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