लंदन में चलेगा गुरविंदर की स्टिक का जादू

Jalandhar Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
जालंधर। खेतों में हल जोतने वाले किसान का बेटा हाकी स्टिक के साथ लंदन ओलंपिक में हिस्सा लेने पहुंच गया है। फारवर्ड खेलने वाले गुरविंदर सिंह चांडी के परिवार और हर पंजाबी को पूरी उम्मीद है कि गुरविंदर की स्टिक लंदन ओलंपिक में तहलका मचाएगी और देश को पदक दिलाएगी। गुरविंदर सिंह चांडी 26 जून को फ्रांस के लिए निकल गए। इन दिनों वे स्पेन में हैं। वहां से 20 जुलाई को लंदन पहुंच जाएंगे। गुरविंदर इन दिनों ओएनजीसी में सहायक मैनेजर के पद पर तैनात हैं।
घर से जगा हाकी प्रेम
अपने चाचा बलवीर सिंह चांडी से हाकी के गुर सीखने वाले गुरविंदर सिंह ने छठी कक्षा से ही स्टिक को हाथ में उठा लिया था। हाकी के प्रति लगाव उनका घर से ही जगा। परिवार ने इस प्रेम को और गहरा करने में सहयोग दिया। फिर उन्होंने सुरजीत हाकी अकादमी में ट्रेनिंग ली। गुरविंदर सिंह ने डीएवी कालेज से स्नातक किया और पंजाब एंड सिंध बैंक की तरफ से हाकी खेली।
ढाका से मिली पहचान
गुरविंदर को 2004 में ढाका में आयोजित जूनियर हाकी चैलेंज कप में खेलने का मौका मिला। बेहतर प्रदर्शन से उन्होंने न केवल कप जीता बल्कि वे मैन ऑफ द सीरीज भी बनेे। 2006 में पोलैंड में जूनियर चैलेंज कप में मैन ऑफ द सीरीज का खिताब हासिल किया और टीम ने कप पर कब्जा किया। इसी साल साउथ एशियन गेम्स कोलंबो और वर्ल्ड कप 2010 में गुरविंदर सिंह का प्रदर्शन लाजवाब रहा। 2009 में उन्होंने इंग्लैंड, बेल्जियम, हॉलैंड सीरीज में हिस्सा लिया। 2009 में कनाडा सीरीज में भी गुरविंदर सिंह को मौका मिला। इसके बाद ओलंपिक क्वालीफाई में गुरविंदर सिंह ने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को लेने के लिए मजबूर कर दिया।
दादी को वाहे गुरु का भरोसा
इन दिनों गुरविंदर सिंह के घर में खुशी का माहौल है। परिवार को गुरविंदर से ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन की पूरी उम्मीद है। मां जसविंदर कौर और बुजुर्ग दादी से जब इस बारे में बात की गई तो दोनों के चेहरे पर उम्मीद की चमक थी। मां ने कहा कि गुरविंदर देश का नाम रोशन करके लौटेगा। उसमें हुनर है और उसने मेहनत भी काफी की है। न दिन देखता था और न रात। स्टिक लेकर प्रैक्टिस में उसने खूब पसीना बहाया है। वाहे गुरु मेहनत का फल जरूर देता है। गुरविंदर की दादी मोहिंदर कौर की आंखें उस घड़ी के इंतजार को तरस रही हैं, जब गुरविंदर ओलंपिक में विरोधी टीमों के छक्के छुड़ाएगा। वे हंसकर कहती हैं कि गुरविंदर के चाचा बलवीर सिंह भी इंटरनेशनल खिलाड़ी रहे हैं। इसे अपने चाचा से खेल के काफी गुर मिले हैं।

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