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दादा का सवाल, मेरा जतिंदर कब छूटेगा लाहौर जेल से!

Jalandhar Updated Sat, 07 Jul 2012 12:00 PM IST
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कपूरथला। सरबजीत की तरह पंजाब के कई युवक बरसों से पाकिस्तान की जेलों में हैं। उनके परिवार के लोग उनकी रिहाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जिले के कसबा ढिलवां के नजदीकी गांव सैफलाबाद निवासी बुजुर्ग दंपति महिंदर सिंह व निर्मल कौर की आंखों के आंसू उस दिन से सूख नहीं रहे हैं जब से उन्हें यह पता चला कि उनका पौत्र जतिंदर लाहौर जेल में है। इस खबर से उन्हें जहां यह यह सुकून मिला कि कम से कम उनका पौत्र जीवित है, वहीं तभी से उन्हें यह चिंता सताए जा रही है कि कहीं सरबजीत की तरह जतिंदर का जीवन भी लाहौर की जेल में ही बर्बाद न हो जाए।
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तीन साल के वैध वीजा पर दुबई गए जतिंदर के दिमाग पर ब्रिटिश पौंड की ऐसी परत चढ़ी कि कबूतरबाजों के चंगुल में फंसकर यूके जाने के चक्कर में वह ईरान की जेल में पहुंच गया। ईरानी जेल से छूटने के बाद वह अगवा हुआ और फिरौती देकर आजाद होने के बाद फिर पाकिस्तान की जेल की हवा खा रहा है। बुजुर्ग दंपति महिंदर सिंह व निर्मल कौर ने बताया कि 24 वर्षीय जतिंदर सिंह अगस्त 2009 में तीन वर्ष के वैध वीजा पर दुबई गया था। मार्च 2012 में उसने किसी कबूतरबाज के चंगुल में आकर इंग्लैंड जाने के लिए अपनी कुल जमा पूंजी उनके हवाले कर दी। अवैध रूप में इंग्लैंड पहुंचाने के चक्कर में कबूतरबाजों ने जतिंदर को ईरान की सीमा के अंदर धकेल दिया, जहां वह ईरान पुलिस के हत्थे चढ़ गया। 15 दिन तक जेल में रखने के बाद ईरान पुलिस ने जतिंदर को सीमा पार कराके अफगानिस्तान में धकेल दिया।
बताते हैं कि अफगानिस्तान में जतिंदर का किसी अपराधी गुट ने अपहरण कर लिया। इस संबंध में उन्हें पाकिस्तान के किसी नंबर से तीन लाख रुपये फिरौती के रूप में देने का फोन आया। बुजुर्ग महिंदर सिंह ने बताया कि जतिंदर सिंह की माता की पहले ही मौत हो चुकी है और उनका पिता मानसिक संतुलन खो चुका है। जतिंदर के दादा-दादी और अन्य रिश्तेदारों ने यूके निवासी बिक्रमजीत सिंह के सहयोग से किसी तरह अपहरणकर्ताओं तक तीन लाख रुपये की राशि पहुंचाकर उसे आजाद करवा लिया, लेकिन उन अज्ञात अपहरणकर्ताओं ने जतिंदर को पाकिस्तान जाने वाली ट्रेन में बैठा दिया जहां वह पाकिस्तान पुलिस के हत्थे चढ़ लाहौर जेल पहुंच गया।
अपहरणकर्ताओं से मुक्त होने के बाद जतिंदर का परिवार से किसी तरह का कोई संपर्क नहीं रहा। पाकिस्तान से किसी अज्ञात व्यक्ति ने फोन करके दादा-दादी को सूचना दी कि वह कुछ दिन पहले ही लाहौर जेल से रिहा हुआ है और जेल में जतिंदर ने उसे अपने घर का नंबर देकर उसके लाहौर जेल में होने की घर पर सूचना देने को कहा था। अब जिस दिन से उन्हें पता चला है कि जतिंदर लाहौर जेल में है, दादा-दादी अजीब मुश्किल में है। उन्होंने मुख्यमंत्री पंजाब प्रकाश सिंह बादल, केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री परनीत कौर और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मामले में दखल देकर उनके घर के चिराग जतिंदर की रिहाई के लिए प्रयास करने की अपील की है।
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