दसूहा चुनाव में हर मत के लिए मशक्कत

Jalandhar Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
होशियारपुर। दसूहा विधानसभा उपचुनाव लड़ रहे तीनों दलों के उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार अभियान छेड़े जाने से दसूहा का राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। जहां भाजपा उम्मीदवार सुखजीत कौर साही को दसूहा में विधायक के रूप में अपने पति के शासनकाल के दौरान कराए गए विकास कार्यों का सहारा है वहीं , कांग्रेस के अरुण डोगरा मिक्की, कंडी क्षेत्र में अपने पिता के प्रभाव के बूते पर चुनाव में जीत को लेकर आशान्वित हैं। हालांकि साही को उनके पक्ष में सहानुभूति वोट का एक लाभ भी मिलेगा।
गौरतलब है कि सुखजीत कौर साही के पर पति अमरजीत साही की विस में दसूहा का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और उनका कुछ दिनों पहले 54 साल की उम्र में निधन हो गया था. इस बीच पार्टी के वोट और काडर के प्रति आश्वस्त होने के अलावा पीपीपी के उम्मीद एडवोकेट घुम्मन सहित तीनों उम्मीदवार इस बार चुनाव न लड़ रहे अन्य दलों के वोट पर भी नज़रें गड़ाए हैं। तीनों ही दलों से लोग शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) और बसपा के मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा पिछले विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े दोनों उम्मीदवारों का साथ हासिल करने की भी कोशिश की जा रही है। तीनों उम्मीदवारों और उनके समर्थक इस के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं कि किसी तरह इन्हें अपने पक्ष में किया जाए और विशेष रूप से बसपा का साथ हासिल करने को सभी एड़ी चोटी का जोर लगाए हैं। बसपा ने पिछला चुनाव लड़ा और बसपा के उम्मीदवार प्यारे लाल 4 हजार से अधिक वोट मिले थे. अब यह समय है जब बसपा नहीं लड़ रही है तो इन वोटों का महत्व समझते हुए सभी दल इन्हें किसी भी कीमत पर अपने पक्ष में करने को उतारू हैं। जबकि पिछले चुनाव में जीत हार का अंतर करीब साढ़े छह हजार का था तो जाहिर है कि कि बसपाई वोट दोनों ओर से चुनाव का चेहरा बदल सकते हैं. इसके मद्देनजर जहां शिरोमणि अकाली दल - भाजपा नेताओं बसपा नेताओं से संपर्क करने में जुटे हैं कि किसी तरह उनके पक्ष में इस वोट बैंक का झुकाव हो जाए वहीं कांग्रेस नेतृत्व भी कड़ी मेहनत से कोशिश कर रहा है यह वोट उनके पाले में आएं। भाकपा-सीपीएम नेतृत्व की मदद के साथ पीपीपी नेता भी बसपा से अपने उम्मीदवार के लिए वोट लेने की कोशिश कर रहे हैं. बसपा के अलावा, गत चुनाव में शिरोमणि अकाली दल (ए) को 697 वोट मिले था और दो निर्दलीय क्रमश: लगभग 375 और 1700 वोट ले गए थे। अब इन तीनों को भी किसी भी कीमत पर उनके पक्ष में जुटाने चुनाव लड़ रहे दलों के नेता जुगत भिड़ाने में जुटे हैं। पिछले चुनाव के आंकड़े अगर भाजपा अपने पक्ष में इन्हें हासिल कर पाती है तो भाजपा एक विशाल जीत के लिए अग्रसर होगी और अगर कांग्रेस उन्हें अर्जित करने में सफल रहती है तो कांग्रेस की जीत भी तय मानी जाएगी। इसके चलते दोनों दलों के नेता हर हाल में बसपा, शिरोमणि अकाली दल (ए) और पिछले चुनाव के निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन पाने की कोशिश कर रहे हैं.

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