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सुखजीत को टिकट से साही समर्थकों में जोश

Jalandhar Updated Thu, 21 Jun 2012 12:00 PM IST
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होशियारपुर। दसूहा उपचुनाव के लिए दिवंगत विधायक अमरजीत साही के पत्नी सुखजीत कौर साही को टिकट दिए जाने का जहां भाजपा में स्वागत हुआ है वहीं आम जनता भी इस मुद्दे पर साही परिवार के साथ दिख रही है। इस बीच भाजपा का ही एक वर्ग इस फैसले को लेकर शांत नजर आया। इस सब के बीच जहां सुखजीत कौर को सहानुभूति वोटिंग का लाभ मिलना तय है वहीं साही विरोधी रहे भाजपा खेमे में भी इसे लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है।
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उधर, कांग्रेस में भी नाराज खेमे को मनाने के साथ-साथ पिछले चुनाव में कांग्रेस विरोध का कारण बने एक खेमे को इस बार चुनावी मुहिम से बाहर रखे जाने की रणनीति बनने लगी है। इसी बीच कांग्रेस वर्कर फोरम भी नाराज़ कांग्रेसियों से संपर्क कर अपना प्रत्याशी उतारने के मूड में है।
पार्टी टिकट के प्रत्याशी रहे रघुनाथ राणा का टिकट न मिलने के बाद अख्तियार किया जाने वाला रुख भी इसमें एक बड़ी भूमिका अदा करेगा। दसूहा इलाके में राजपूत बिरादरी का अच्छा वोट बैंक है और रघुनाथ राणा की राजपूत बिरादरी में अच्छी पैठ भी मानी जाती है। इसके चलते राणा का रुख भाजपा के लिए बहुत कुछ तय करेगा। साही का लगातार दो बार इलाके में कांग्रेस का स्तंभ माने जाने वाले रमेश चंद्र डोगरा को शिकस्त देना जाहिर तौर पर उनकी लोकप्रियता और इलाके पर उनकी पकड़ का परिचायक रहा है। साही परिवार को ही टिकट दिए जाने से इस बार जहां साही समर्थकों एड़ी चोटी का जोर लगाएंगे वहीं चुनावी भविष्य तय करने में अहम भूमिका अदा करने वाली फ्लोटिंग वोट की सहानुभूति लहर के प्रभाव में आने से निश्चय ही साही परिवार के लिए चुनावी डगर आसान होगी, लेकिन इस बीच भाजपा का एक मजबूत खेमा जो हाल-फिलहाल तक राणा को टिकट दिए जाने के पक्ष में था उसका रुख भी चुनाव में अहम भूमिका निभाएगा। हलके के सीमावर्ती गांवों में अपना प्रभाव रखने वाले पूर्व मंत्री अरुणेश शाकर का पहले ही टिकट के लिए साही परिवार का समर्थन करना भी एक अच्छा संकेत है जो निश्चय ही भाजपा और सुखजीत कौर साही के लिए एक अच्छा संकेत है।
उधर मिक्की डोगरा ने भी अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पिछले दो चुनाव में मिक्की के पिता के करीबी माने जाने वाले एक कांग्रेस नेता और उनके समर्थकों का डोगरा के साथ चलना उन्हें भारी पड़ा था। यही नहीं कुछ जगहों पर उक्त खेमे के नेता के प्रति जनता की नाराजगी जनसभाओं में ही खुल कर सामने आई थी। इस बार जहां मिक्की इस भूल को सुधारने के मूड में उक्त नेता और उनके साथियों को चुनावी समर में उतारने से बचने की रणनीति पर अमल करते दिखेंगे वहीं पुराने व नाराज कांग्रेसियों को मनाने और साथ लाने की कोशिशें भी टिकट की घोषणा के साथ ही तेज कर दी गई हैं।
इस बीच कांग्रेस वर्कर फोरम के प्रमुख वरुण मेहता ने भी दसूहा में नाराज़ कांग्रेसियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। वरुण ने बताया कि जल्दी ही दसूहा से फोरम का प्रत्याशी उतारने के संबंध में निर्णय ले लिया जाएगा। फोरम का मकसद उपेक्षा का दंश झेल रहे पुराने कांग्रेस वर्करों और नेताओं का मान-सम्मान बहाल कराना है और इसके लिए फोरम किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
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