वैज्ञानिकों को बादलों ने किया निराश

Jalandhar Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
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कपूरथला। सूबे में बुधवार सुबह आकाश में बादल छाए रहने से 100 साल बाद आए शुक्र पारगमन का अद्भुत नजारा देखने से लोग वंचित रह गए। बुधवार को पुष्पा गुजराल साइंस सिटी कपूरथला में यह दुर्लभ नजारा देखने करीब सात सौ लोग पहुंचे थे, लेकिन उन्हें निराशा ही मिली। अब दोबारा यह दुर्लभ घटना देखने के लिए 105 साल का लंबा इंतजार करना पड़ेगा। अगला शुक्र पारगमन 2117 में देखा जाएगा। इसके पहले यह नजारा 1631, 1639, 1761, 1769, 1874, 1882, 2004 और अब 8वीं बार 6 जून 2012 को देखा जाना था। यह बात पुष्पा गुजराल साइंस सिटी के निर्देशक डा. आरएस खांडपुर ने खास बातचीत के दौरान कही।
डा. खांडपुर ने बताया की बुधवार को पुष्पा गुजराल साइंस सिटी में इस अद्भुत नजारे को विशेष टेलीस्कोप से सुबह 7 से 10 बजे दिखाया जाना था, लेकिन आकाश में बादलों की वजह से यह अद्भुत नजारा देखा नहीं जा सका। इस अवसर के लिए मुख्यातिथि के तौर पर प्रमुख सचिव विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी डा. कर्ण अवतार सिंह पहुंचे थे। डा. खांडपुर ने बताया कि शुक्र पारगमन का अर्थ है सूरज के सम्मुख शुक्र ग्रह। सूरज के गिर्द शुक्र ग्रह 225 दिन में परिक्रमा पूरी करता है। हमारी धरती 365 दिन में यह सफर तय करती है। विज्ञानियों के मुताबिक धरती और सूरज के बीच दूरी मापने में यह शुक्र पारगमन बहुत ही मददगार है। शुक्र पारगमन हमेशा ही आठ वर्ष के अंतराल के साथ जोड़ों के रूप में देखा जाता है। आकाश के इस अद्भुत नजारे को हम नंगी आंखों के साथ नहीं देख सकते। इसको विशेष तरह के सोलर फिल्टरों या टेलीस्कोप के आगे सोलर फिल्टर लगाकर ही देखा जा सकता था।
अब तक विज्ञानियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि इस पारगमन का धरती पर कोई भी बुरा प्रभाव पड़ने वाला। इसलिए हरेक व्यक्ति को इस अद्भुत आकाशी नजारे के दर्शन जरूरकरने चाहिए। हमारी जिंदगी में दोबारा यह घटना नहीं घटेगी।

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