कांग्रेस में फूट: कैप्टन अमरिंदर 64वें नेता जिन्होंने कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाई, सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते...

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Mon, 06 Dec 2021 02:18 PM IST

सार

आजादी से पहले दो बार और आजादी के बाद कांग्रेस में 62 बार दरार पड़ी। कैप्टन अमरिंदर सिंह से पहले 2016 में अजीत जोगी ऐसे आखिरी कांग्रेसी थे, जिन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई। इस तरह कांग्रेस के इतिहास में अब तक 64 बार ऐसे बड़े मौके आए, जब नेताओं ने अलग होकर नई पार्टी बना ली।
कैप्टन अमरिंदर सिंह और सोनिया गांधी।
कैप्टन अमरिंदर सिंह और सोनिया गांधी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब में कांग्रेस छोड़ने के बाद आखिरकार कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नई पार्टी का एलान कर दिया। उन्होंने पंजाब लोक कांग्रेस नाम से नई पार्टी का गठन किया है। ये भी कहा कि वह पंजाब में अगला चुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर लड़ेंगे। 
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इसी के साथ ये 64वीं बार है, जब कांग्रेस से अलग होकर कोई नई पार्टी खड़ी हुई है। 1885 से अब तक कांग्रेस ने 64 ऐसे बड़े मौके देखे, जब कांग्रेस छोड़ने के बाद नेताओं ने अपनी नई पार्टी बना ली। 1969 में तो कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने इंदिरा गांधी को ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। तब इंदिरा ने अलग कांग्रेस बना ली थी। सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते सबसे ज्यादा फूट पड़ी है। 1998 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी की कमान संभाली थी। तब से लेकर अब तक कांग्रेस की फूट से 26 नए दल बन चुके हैं। 

आजादी से पहले दो बार कांग्रेस में दरार पड़ी

सुभाष चंद्र बोस (फाइल फोटो)
सुभाष चंद्र बोस (फाइल फोटो) - फोटो : गूगल
1923 : चितरंजन दास ने कांग्रेस छोड़कर स्वराज पार्टी की स्थापना की थी। होम लाइब्रेरी की पुस्तक 'ग्रेट मेन ऑफ इंडिया' में इसका उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि चितरंजन दास काउंसिल में शामिल होकर ब्रिटिश सरकार की नीतियों का नए तरह से विरोध करना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस अधिवेशन में उनका ये प्रस्ताव पास नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने स्वराज पार्टी बना ली। 1924 में दिल्ली में कांग्रेस के अतिरिक्त अधिवेशन में उनका ये प्रस्ताव पास हो गया। 1925 में स्वराज पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया।

1939 : महात्मा गांधी से अनबन होने पर सुभाष चंद्र बोस और शार्दुल सिंह ने ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक नाम से अलग पार्टी खड़ी कर ली। पश्चिम बंगाल में अभी भी ये पार्टी अस्तित्व में है। हालांकि, इसका जनाधार काफी कम हो चुका है।

आजादी के बाद सबसे ज्यादा बिखरी पार्टी

जीवटराम कृपलानी और सरदार पटेल
जीवटराम कृपलानी और सरदार पटेल - फोटो : सोशल मीडिया
आजादी के बाद कांग्रेस में सबसे ज्यादा फूट पड़ी। तब से 2016 तक कांग्रेस छोड़ने वाले नेता 62 नई राजनीतिक पार्टी शुरू कर चुके हैं। आजादी के बाद कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं ने 1951 में तीन नई पार्टी खड़ी की।

इसमें जीवटराम कृपलानी ने किसान मजदूर प्रजा पार्टी, तंगुतूरी प्रकाशम और एनजी रंगा ने हैदराबाद स्टेट प्रजा पार्टी और नरसिंह भाई ने सौराष्ट्र खेदूत संघ नाम से अलग राजनीतक दल शुरू की। इसमें हैदराबाद स्टेट प्रजा पार्टी का विलय किसान मजदूर प्रजा पार्टी में हो गया। बाद में किसान मजदूर प्रजा पार्टी का विलय प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और सौराष्ट्र खेदूर संघ का विलय स्वतंत्र पार्टी में हो गया।

 

1956-1970 तक कांग्रेस से निकले नेताओं ने 12 नए दल बनाए

सी राजगोपालाचारी ने भी कांग्रेस छोड़ दी थी।
सी राजगोपालाचारी ने भी कांग्रेस छोड़ दी थी। - फोटो : सोशल मीडिया
कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे सी. राजगोपालाचारी ने 1956 में पार्टी छोड़ दी। बताया जाता है कि तमिलनाडु में कांग्रेस नेतृत्व से विवाद होने के बाद उन्होंने अलग होने का फैसला लिया था। रोजगोपालाचारी ने पार्टी छोड़ने के बाद इंडियन नेशनल डेमोक्रेटिक्स कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। ये पार्टी मद्रास तक ही सीमित रही। हालांकि, बाद में राजगोपालाचारी ने एनसी रंगा के साथ 1959 में स्वतंत्र पार्टी की स्थापना कर ली और इंडियन नेशनल डेमोक्रेटिक्स पार्टी का इसमें विलय कर दिया।

स्वतंत्र पार्टी का फोकस बिहार, राजस्थान, गुजरात, ओडिशा और मद्रास में ज्यादा था। 1974 में स्वतंत्र पार्टी का विलय भी भारतीय क्रांति दल में हो गया था। इसके अलावा 1964 में केएम जॉर्ज ने केरल कांग्रेस नाम से नई पार्टी का गठन कर दिया। हालांकि, बाद में इस पार्टी से निकले नेताओं ने अपनी सात अलग-अलग पार्टी खड़ी कर ली। 1966 में कांग्रेस छोड़ने वाले हरेकृष्णा मेहताब ने ओडिशा जन कांग्रेस की स्थापना की। बाद में इसका विलय जनता पार्टी में हो गया।
 

1968 तक और कौन-कौन सी पार्टी बनी?

कांग्रेस से अलग होकर मणिपुर पीपल्स पार्टी बनी।
कांग्रेस से अलग होकर मणिपुर पीपल्स पार्टी बनी। - फोटो : सोशल मीडिया
साल  कौन सी पार्टी बनी बाद में क्या हुआ
1967  बांग्ला कांग्रेस कांग्रेस में विलय
1967 विशाल हरियाणा पार्टी कांग्रेस में विलय
1967 भारतीय क्रांति दल लोक दल में विलय
1968 मणिपुर पीपल्स पार्टी अभी भी अस्तित्व में है

1969 और 1978 में इंदिरा को ही पार्टी से निकाल दिया गया

इंदिरा गांधी जयंती 2021
इंदिरा गांधी जयंती 2021 - फोटो : facebook/IndiraPriyadarshiniGandhi
ये बात 12 नवंबर 1969 की है। तब कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को ही पार्टी से निकाल दिया। उन पर अनुशासन भंग करने का आरोप लगा था। इसके जवाब में इंदिरा गांधी ने नई कांग्रेस खड़ी कर दी। इसे कांग्रेस आर नाम दिया। बताया जाता है कि जिन नेताओं ने इंदिरा को पार्टी से निकाला था, उन्हीं ने 1966 में उन्हें प्रधानमंत्री बनाया था। तब इंदिरा गांधी के पास अनुभव और संगठन की समझ कम थी। हालांकि, सरकार चलाने के साथ ही वह एक मजबूत राजनीतिज्ञ के रूप में उभरीं। 1967 में उन्होंने अकेले के दम पर चुनाव लड़ा और मजबूती से जीत हासिल की।

इंदिरा से विवाद के चलते ही के. कामराज और मोरारजी देसाई ने इंडियन नेशनल कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशन नाम से अलग पार्टी बनाई थी। बाद में इसका विलय जनता पार्टी में हो गया। 1969 में ही बीजू पटनायक ने ओडिशा में उत्कल कांग्रेस, आंध्र प्रदेश में मैरी चेना रेड्डी ने तेलंगाना प्रजा समिति का गठन किया। इसी तरह 1978 में इंदिरा ने कांग्रेस आर छोड़कर एक नई पार्टी का गठन किया। इसे कांग्रेस आई नाम दिया। एक साल बाद यानी 1979 में डी देवराज यूआरएस ने इंडियन नेशनल कांग्रेस यूआरएस नाम से पार्टी का गठन किया। देवराज की पार्टी अब अस्तित्व में नहीं है।

1998 में ममता और 1999 में शरद पवार अलग हुए

ममता बनर्जी और सोनिया गांधी। 1998 में ममता ने कांग्रेस पार्टी छोड़कर टीएमसी बना ली।
ममता बनर्जी और सोनिया गांधी। 1998 में ममता ने कांग्रेस पार्टी छोड़कर टीएमसी बना ली। - फोटो : सोशल मीडिया
1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़कर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस बना ली थी। वे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं। इसके एक साल बाद ही शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का गठन कर लिया था। अब इसे एनसीपी के नाम से जाना जाता है। शरद पवार अभी भी इसके प्रमुख हैं। आखिरी बार 2016 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के बड़े नेता रहे अजीत जोगी ने पार्टी छोड़कर छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस नाम से नया दल बना लिया।
 

1971 से 2021 तक बनी नई पार्टियां

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