सीबीआई ने सीईओ, डीईओ व तहसीलदार को ठहराया आरोपी

Firozpur Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
फिरोजपुर। सीबीआई ने छावनी क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्त के मामले की पहले चरण की जांच पूरी करके रिपोर्ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को सौंप दी है। बताया जा रहा है कि सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कैंटोनमेंट बोर्ड के तत्कालीन सीईओ, डीईओ (डिफेंस एस्टेट आफिसर) व तहसीलदार के अलावा संबंधित अधिकारियों को भी आरोपी ठहराया है। इस मामले में कई असरदार लोगों पर परचा दर्ज हो सकता है। सीबीआई ने अभी दस साल के जमीन रिकार्ड की जांच पूरी की है। अब जांच का दूसरा चरण शुरू होने वाला है। मालूम हो कि हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई छावनी क्षेत्र की जमीन की 1970 से 2011 के बीच हुई खरीद-फरोख्त की जांच कर रही है।
कैंटोनमेंट बोर्ड के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि छावनी क्षेत्र में तकरीबन सात हजार पांच सौ की सेल डीड हुई हैं, जो सभी अवैध हैं। सीबीआई ने 1970 से 1980 तक के जमीन के रिकार्ड की जांच पूरी कर ली है। छावनी क्षेत्र में कुल 170 बंगले हैं, इनमें से 160 बंगले डीईओ के अंतर्गत हैं। दस बंगले कैंटोनमेंट बोर्ड के अंतर्गत आते हैं। सीबीआई ने पहले चरण में 28 बंगलों की खरीद-फरोख्त की जांच की है। जांच में पता चला है कि इनकी रजिस्ट्री बिना एनओसी के हुई हैं, जो अवैध हैं। यही नहीं इन्हें कई बार बेचा और खरीदा गया। इनकी खरीद-फरोख्त में सीईओ, डीईओ व तहसीलदार की मिलीभगत है। सीबीआई ने पहले चरण की जांच हाईकोर्ट को सौंपी है जिसमें खरीद-फरोख्त में सीईओ, डीईओ व तहसीलदार को आरोपी ठहराया है।
सभी रजिस्ट्रियां अवैध
कैंटोनमेंट बोर्ड व डिफेंस एस्टेट आफिसर से बगैर एनओसी लिए उक्त 28 बंगलों की तहसीलदार ने रजिस्ट्रियां की हैं। छावनी की किसी भी जमीन की तहसील में हुई रजिस्ट्री के साथ टाइटल डीड नहीं लगी है। नियम के मुताबिक जो भी व्यक्ति अपनी जमीन किसी को बेचता है, उसके साथ टाइटल डीड लगती है। तभी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री होती है। लेकिन छावनी की जमीन की खरीद-फरोख्त में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
बंगला बेचने का नियम
डीईओ व सीईओ के अंतर्गत 170 बंगलों को बेचने का एक अलग से नियम है। किसी भी बंगले को बेचना है तो उसका पूरा स्ट्रक्चर बेचना होता है। लेकिन फिरोजपुर छावनी क्षेत्र में एक बंगले के कई हिस्से करके बेचे गए हैं जो नियमों के विपरीत है। 160 बंगले डीईओ के अंतर्गत हैं, लेकिन आज तक जालंधर के किसी भी अधिकारी ने यहां आकर कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि उनकी मर्जी के बिना ऐसा नहीं हो सकता है। इसीलिए सीबीआई ने डीईओ की बंगलों की खरीद-फरोख्त में मिलीभगत जाहिर की है।
दूसरे दौर की जांच शुरू होगी
सीबीआई 1980 से 1990 का जमीन रिकार्ड खंगालने का काम दो दिन के भीतर शुरू करने वाली है। इस चरण में जिन बंगलों की जांच होनी है, उनमें कांग्रेस के विधायक राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, पूर्व विधायक गुरनैब सिंह बराड़, अंतरराष्ट्रीय शूटर खिलाड़ी रोंजन सोढ़ी समेत कई बड़े लोग शामिल हैं।

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