विधायक की मांगों पर नहीं माने सीएम

Firozpur Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
मालेरकोटला (संगरूर)। बकरीद के मौके पर शनिवार को अपनी मांगों को मनवाने के लिए बेकरार मुसलिम समाज को निराशा हाथ लगी। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के सामने प्रस्तुत की गई करीब आधा दर्जन मांगों में से किसी एक को भी स्वीकार करने के लिए सीएम ने स्पष्ट रूप से हां नहीं की। सीएम सभी मांगों को जल्द मंजूर करने की बात कह कर चले गए। इस बार पहली बार मुख्यमंत्री ने ईदगाह के रख-रखाव और उसे जमीन खरीदने के लिए किसी प्रकार की ग्रांट देने की घोषणा भी नहीं की है। मुसलिम समाज को इस बार उनसे बड़ी उम्मीदें थीं।
शनिवार को बड़ी ईदगाह में बकरीद की नमाज के तुरंत बाद अपने भाषण में विधायक और मुख्य संसदीय सचिव बेगम फरजाना आलम ने शहर की तरक्की और मुसलिम समाज की बेहतरी के लिए करीब सात मांगें रखीं। मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए विधायक ने कहा कि मुसलिम समाज अब केवल मालेरकोटला तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि अब सूबे के प्रत्येक शहर, कस्बे और गांवों में इस अल्पसंख्यक समुदाय की अच्छी खासी संख्या है। अब पंजाब सरकार सूबे के हर सरकारी बोर्ड और कार्पोरेशनों में मुसलिम समाज का प्रतिनिधित्व कायम करे। मालेरकोटला के लोगों को नहरी पानी की जरूरत है, इसलिए उनके लिए नहरी पानी का प्रबंध किया जाए। शहर के लोग रेलवे फाटकों से परेशान हैं इसके लिए केंद्र सरकार से बातचीत करके रुके पड़े ओवरब्रिज का काम चालू करवाया जाए और शहर को विशेष पैकेज देने आदि मांगें विधायक ने रखी।
इसके बाद मंच पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने सभी मांगों पर इतना ही कहा कि मुसलिम समाज की हर मांग उनके लिए आदेश है इसलिए शीघ्र ही उन पर विचार किया जाएगा। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने शहर की सीवरेज व्यवस्था के लिए चार महीने पहले भेजे गए 12 करोड़ का भी जिक्र किया और कहा कि इनमें से छह करोड़ शहर को भेज दिए गए हैं और बाकी भी जल्द भेजकर प्रस्तावित कार्यों को अगले साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।
शहर निवासी मोहम्मद सुलेमान ने सीएम के दौरे पर नाराजगी व्यक्त करते कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े इस नगर के लोगों को काफी आशाएं थीं कि मुख्यमंत्री ईद के मौके आएंगे और शहर के लिए विशेष पैकेज देकर ईद का तोहफा देंगे लेकिन इस बार कुछ भी ऐलान न किए जाने से उन्हें हैरानी हुई है। शहर का बस स्टैंड सालों से विकास की बाट जोह रहा है जबकि यहां की ज्यादातर सड़कें टूटी पड़ी हैं। सरकारी अस्पताल में कुल 22 डाक्टरों में से पंद्रह पद रिक्त पड़े हैं। स्लम एरिया डिस्पेंसरी में महीनों से डाक्टर नहीं आने के चलते उसे ताला लगाने की नौबत आ गई है। घरों में पेयजल व्यवस्था का आलम यह है कि लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ऐसे में यहां के लोगों की समस्याएं सुनने की बजाए सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा है।

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