पाक में दस भारतीय कैदी हो गए पागल!

Firozpur Updated Sat, 30 Jun 2012 12:00 PM IST
मुदकी (फिरोजपुर)। पाकिस्तान की जेल से 30 साल बाद रिहा होकर आए सुरजीत सिंह ने कहा है कि लाहौर की कोट लखपत जेल में एक दर्जन भारतीय कैदियों की अस्थियां कलश में रखी हैं। इन अस्थि कलशों में कैदियों की नाम लिखी परचियां हैं। अमर उजाला से खास बातचीत में सुरजीत ने बताया कि जेल में 20 भारतीय कैदी बंद हैं। इनमें से दस पागल हो चुके हैं।
सुरजीत सिंह ने कहा कि उन्हें 2 फरवरी 1982 को पाकिस्तानी पुलिस ने लाहौर से पकड़ा था। 30 अक्तूबर 1985 तक उससे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी व फौज पूछताछ करती रही। 1985 में अदालत ने उसे सजा सुनाकर कोट लखपत जेल भेज दिया। तब से वे वहीं बंद रहे। सुरजीत बताते हैं कि जेल में कई भारतीय कैदी मर गए और उनकी अस्थियां कलशों में डालकर व नाम लिखकर जेल में रखी हुईं हैं। जेल में 20 भारतीय कैदियों में से दस पागल हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि जेल में सरबजीत सिंह, कृपाल सिंह व जतिंदर सिंह को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई गई है। जतिंदर को कोट लखपत जेल से बदलकर सेखोंपुर जेल में भेजा गया है। जेल में गुरुद्वारा बना है। सुरजीत को गुरुद्वारे की सेवा करने की ड्यूटी दी गई थी। उन्होंने बताया कि उन्हें पाकिस्तान जासूसी करने के लिए जब भेजा गया था तब उनका पहचान पत्र अनवर नाम से बना था। जेल में उन्हें कच्चा खाना दिया जाता था। वे खुद अपना भोजन पकाकर खाते थे। जेल में कई मुसलमान कैदियों से उनकी दोस्ती हो गई थी। मलक रियाज व जावेद हासिम उनके अच्छे दोस्त थे। जेल में कैदियों के साथ व्यवहार अच्छा किया जाता था।

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