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रेलवे की जमीन जमींदारों को ठेके पर दी तो कार्रवाई

Firozpur Updated Thu, 21 Jun 2012 12:00 PM IST
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फिरोजपुर। रेल पटरी के आसपास की जमीन पर रेलवे अवैध कब्जे हटाने में नाकाम साबित हो रही है। रेलवे की नाजुक आर्थिक स्थिति सुधारने को रेलवे के विशेषज्ञ विभागीय जमीन से प्रति वर्ष करोड़ों रुपये की कमाई करने की सलाह दे रहे हैं। अधिकारी इस तरफ ध्यान तक नहीं दे रहे। ट्रैक के आसपास की जमीन पर लोगों ने कब्जा कर इस पर खेती करने के लिए आगे जमींदारों को ठेके पर दी है। इससे होने वाली कमाई सरकारी खजाने की बजाए नेता और कई अधिकारियों की जेब में जा रही है। बताते हैं कि रेलवे बोर्ड ने एक पालिसी जारी की थी कि ट्रैक के आसपास वाली जमीन रेलवे के दर्जा चार कर्मियों को लीज पर दी जाए। परंतु अधिकारियों की कार्य करने की कछुआ चाल के चलते अभी तक किसी को लीज पर जमीन नहीं दी गई है, जबकि आवेदन हजारों में आए थे। रेलवे की हजारों एकड़ जमीन पर लोग अवैध कब्जा कर प्रति वर्ष लाखों रुपये कमा रहे हैं।
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रेल अधिकारियों की जमीन लीज पर देने की कार्यशैली इतनी धीमी है कि इसे देख लगता है कि रेलवे के जिन विशेषज्ञों ने जमीन से करोड़ों रुपये की कमाई करने का सुझाव दिया है वह सपना पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। जमीन से कमाई करने के लिए हिंदी व अंग्रेजी में पुस्तक भी रिलीज की गई है। फिरोजपुर से जांलधर, लुधियाना, बठिंडा व फाजिल्का सेक्शन के ट्रैकों के साथ खाली पड़ी जमीन पर लोगों ने अवैध तरीके से धान लगाना शुरू कर दिया है। इससे पूर्व गेहूं की फसल लगाई थी जिसे काट कर लाखों रुपए कमा लिए हैं। यह बात इंजीनियरिंग विभाग के सभी अधिकारी जानते हुए भी इस पर कोई कार्य नहीं कर रहे हैं।
उधर, रेल मंडल प्रबंधक एनसी गोयल ने बताया कि विभागीय जमीन से जल्द ही अवैध कब्जे हटवाएं जाएंगे। यूनियन के जिन नेताओं ने विभागीय जमीन पर कब्जा कर आगे जमींदारों को ठेके पर दी है, उन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विभागीय जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लीज पर जमीन देने के कार्य में तेजी लाई जाएगी।
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